बिहार सरकार ने अपने स्कूलों में क्षेत्रीय भाषाओं को पढ़ाने का फैसला किया है। अगले शैक्षणिक सत्र से पहली और दूसरी कक्षा के छात्रों को मैथिली, भोजपुरी, बज्जिका, मगही, सुरजापुरी और अंगिका जैसी भाषाएं एक विषय के रूप में पढ़ाई जाएंगी। यह बदलाव नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के तहत किया जा रहा है।
पहली और दूसरी कक्षा में क्षेत्रीय भाषाओं की शुरुआत
राज्य के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि इस योजना के तहत पहले चरण में केवल पहली और दूसरी कक्षा के छात्रों को क्षेत्रीय भाषाएं पढ़ाई जाएंगी। इसके बाद इसे कक्षा तीन से पांच तक बढ़ाया जाएगा। इस कदम का मकसद बच्चों को उनकी मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा के अवसर प्रदान करना है।
एक विषय के रूप में क्षेत्रीय भाषाओं का समावेश
मिथिलेश तिवारी के अनुसार, बच्चों की स्थानीयता के आधार पर उन्हें उपयुक्त क्षेत्रीय भाषा एक विषय के तौर पर पढ़ाई जाएगी। यह निर्णय NEP 2020 की सिफारिशों के अनुरूप लिया गया है, जो मातृभाषा आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर देता है। इससे बच्चों की सीखने की क्षमता बेहतर होगी और वे अपनी भाषा में सहजता से पढ़ाई कर सकेंगे।
SCERT द्वारा किताबों की तैयारी
राज्य में इस योजना को लागू करने के लिए राज्य के स्कूलों के लिए पाठ्यपुस्तकों का निर्माण राज्य स्तर की संस्था SCERT (State Council of Educational Research and Training) कर रही है। SCERT के निदेशक यतेंद्र कुमार पाल ने बताया कि ये किताबें शिक्षकों और भाषा विशेषज्ञों की मदद से तैयार की जा रही हैं।
इन पुस्तकों की रूपरेखा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या फ्रेमवर्क 2023 (NCF 2023) और NEP 2020 की सिफारिशों के अनुसार बनाई जा रही है। फिलहाल पहली और दूसरी कक्षा के लिए किताबें तैयार की जा रही हैं, जबकि जल्द ही तीसरी से पांचवीं कक्षा तक के लिए भी क्षेत्रीय भाषा की किताबें विकसित की जाएंगी। उम्मीद है कि आगामी शैक्षणिक सत्र से इन पुस्तकों का प्रयोग शुरू हो जाएगा।
स्रोत: tv9hindi.com





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