नोएडा-गाजियाबाद में कॉलोनी की वैधता कैसे पहचानें?
दिवाली के समय नोएडा और गाजियाबाद में प्लॉट या फ्लैट खरीदने का रुझान बढ़ जाता है। इस दौरान कई बिल्डर आसान किश्तों पर घर या प्लॉट खरीदने का ऑफर देते हैं। लेकिन इन दोनों शहरों में अवैध कॉलोनियों की संख्या भी बहुत ज्यादा है। खासकर गाजियाबाद में 300 से अधिक अवैध कॉलोनियां हैं। लोनी, मुरादनगर, मोदीनगर और हिंडन नदी के आसपास अवैध बसाहट ज्यादा देखी जाती है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि आपकी कॉलोनी वैध है या अवैध।
कॉलोनी वैध या अवैध कैसे पता करें?
नोएडा-गाजियाबाद में अक्सर सड़क किनारे 'किराया मत दो, मकान बनाओ', 'आसान किश्तों में प्लॉट' जैसे बैनर दिखते हैं। लेकिन यह समझना जरूरी है कि आपकी कॉलोनी वैध है या नहीं। अवैध कॉलोनी में प्लॉट लेने पर नक्शा पास होना मुश्किल होता है। इसके लिए सबसे पहले यूपी आवास-विकास परिषद, अथॉरिटी या हाउसिंग बोर्ड से कॉलोनी की वैधता की जानकारी जरूर लें।
जैसे गाड़ी खरीदने से पहले दस्तावेज जांचते हैं, वैसे ही बिल्डर से कॉलोनी के अप्रूवल लेटर, पास किए गए नक्शे और रेरा (Real Estate Regulatory Authority) रजिस्ट्रेशन नंबर की कॉपी मांगें। ये तीन दस्तावेज कॉलोनी की वैधता तय करते हैं। अगर बिल्डर ये दस्तावेज दिखाने से मना करता है, तो सावधान हो जाएं।
कॉलोनी के नक्शे और सड़क की चौड़ाई का क्या महत्व है?
किसी कॉलोनी का नक्शा तभी पास होता है जब कॉलोनी की मुख्य सड़कों की चौड़ाई कम से कम 9 मीटर (30 फीट) हो। कॉलोनी की अंदर की सड़कों की चौड़ाई भी 15, 20 या 25 फीट होनी चाहिए। अगर सड़कें इससे कम चौड़ी हैं, तो नक्शा पास नहीं होता और कॉलोनी अवैध मानी जाती है। इसके अलावा कॉलोनी में ग्रीन एरिया यानी पार्क के लिए जगह होनी भी जरूरी है। अगर पार्क के लिए जगह नहीं छोड़ी गई है, तो कॉलोनी अवैध हो सकती है।
गाजियाबाद में अवैध कॉलोनियों की स्थिति
गाजियाबाद में 300 से अधिक कॉलोनियां अवैध हैं। इसकी पूरी सूची गाजियाबाद डेवलपमेंट अथॉरिटी की वेबसाइट पर उपलब्ध है। आप https://gdaghaziabad.in/list-of-unauthorized-colonies/ पर जाकर अवैध कॉलोनियों की लिस्ट देख सकते हैं। नोएडा अथॉरिटी की वेबसाइट पर भी अवैध निर्माण की सूची उपलब्ध है।
अगर गलती से अवैध कॉलोनी में घर खरीद लिया तो क्या होगा?
अगर आपने गलती से किसी अवैध कॉलोनी में प्लॉट या मकान खरीद लिया है, तो उसका नक्शा पास कराना कठिन होगा। अक्सर ऐसी कॉलोनियों का क्षेत्र किसी एक भू-स्वामी के नाम होता है, जिस पर कई लोगों के नाम जुड़े होते हैं। सड़कें भी उस भू-स्वामी की ही होती हैं, इसलिए निगम सड़कें पक्की नहीं बनाता। नतीजतन, ऐसे मकानों के नक्शे पास नहीं होते और संपत्ति के कागजात विवादित हो सकते हैं।
स्रोत: hindi.news18.com





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