नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) ने CTET और STET के लिए एलिजिबिलिटी नियमों में बदलाव करने के उद्देश्य से एक विशेषज्ञ कमेटी बनाई है। इस कमेटी का काम ITEP ग्रेजुएट्स को इन परीक्षाओं में शामिल करने से जुड़े बदलावों पर सुझाव देना है। यह निर्णय तब आया है जब ITEP का पहला बैच 2027-28 में पास होने वाला है।
ITEP क्या है और इसकी मान्यता
इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (ITEP) नई शिक्षा नीति 2020 के तहत शुरू किया गया चार वर्षीय ग्रेजुएशन कोर्स है। इसे 12वीं के बाद किया जा सकता है और यह दो वर्षीय बीएड के समकक्ष माना जाता है। इस समय 409 उच्च शिक्षा संस्थानों को ITEP संचालित करने की अनुमति मिली है, जहां कुल 777 यूनिट्स के जरिए 38,850 छात्रों को प्रवेश दिया जा सकता है।
हालांकि NCTE ने ITEP को एक मान्यता प्राप्त टीचिंग कोर्स माना है, लेकिन CTET और STET के लिए फिलहाल इसे एलिजिबिलिटी में शामिल नहीं किया गया है। टीचर नियुक्ति के लिए TET पास करना अनिवार्य है, इसलिए NCTE अब इस दिशा में नियमों में बदलाव करने की तैयारी कर रहा है।
NCTE की गठित कमेटी और सदस्य
इस समीक्षा के लिए NCTE ने एक विशेषज्ञ कमेटी बनाई है, जिसका नेतृत्व डीयू सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन (CIE) के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर चंद किरण सलूजा कर रहे हैं। कमेटी में NCERT, KVS, शिक्षा मंत्रालय, NCTE और CBSE के प्रतिनिधि भी शामिल हैं।
कमेटी का काम और समीक्षा के मुद्दे
कमेटी CTET और STET के वर्तमान एलिजिबिलिटी मानकों की गहराई से समीक्षा करेगी। इसके अलावा ITEP ग्रेजुएट्स के लिए आवश्यक बदलावों का सुझाव भी दिया जाएगा ताकि वे इन परीक्षाओं में शामिल हो सकें। मौजूदा TET से जुड़े नियमों का विश्लेषण कर, आवश्यकता अनुसार ITEP के अनुरूप संशोधन प्रस्तावित किया जाएगा।
महत्व और अगला कदम
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शिक्षण क्षेत्र में ITEP कोर्स के छात्र भी अब टीचर पात्रता परीक्षाओं में शामिल हो सकेंगे। इससे शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में नए योग्यता मानदंड स्थापित होंगे। फिलहाल कमेटी की समीक्षा जारी है और सुझावों के आधार पर NCTE नियमों में बदलाव करेगा।
स्रोत: tv9hindi.com





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