OECD की रिपोर्ट में सामने आया है कि AI ट्यूटर की मदद से पढ़ने वाले छात्र पारंपरिक क्लासरूम के मुकाबले कम समय में ज्यादा सीख पा रहे हैं।
मुख्य तथ्य
- OECD की डिजिटल एजुकेशन आउटलुक 2026 रिपोर्ट में AI ट्यूटर की प्रभावशीलता की स्टडी शामिल है।
- अमेरिका के एक विश्वविद्यालय के 316 फिजिक्स के शुरुआती स्तर के छात्रों पर रिसर्च हुई।
- AI ट्यूटर से पढ़ने वाले छात्रों ने कम समय में बेहतर सीख हासिल की।
- स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के ‘ट्यूटर कोपायलट’ AI टूल से ट्यूटर्स की मदद भी मिली।
- AI की सफलता उसके सही डिजाइन और उपयोग पर निर्भर है।
कैसे हुआ अध्ययन?
OECD की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के एक विश्वविद्यालय में 316 छात्रों को दो समूहों में बांटा गया। एक समूह को पारंपरिक क्लासरूम में एक्टिव लर्निंग के जरिए पढ़ाया गया, जबकि दूसरे समूह ने ऑनलाइन AI ट्यूटर की सहायता से पढ़ाई की। यह कोर्स फिजिक्स के शुरुआती स्तर का था।
AI ट्यूटर से सीखने में क्या मिला?
AI ट्यूटर को खासकर छात्रों की समझ बढ़ाने और सीखने की क्षमता सुधारने के लिए डिज़ाइन किया गया था। रिसर्च में यह पाया गया कि AI ट्यूटर से पढ़ने वाले छात्रों ने कम समय में बेहतर परिणाम दिए। उनकी पढ़ाई में रुचि और उत्साह भी अधिक था। OECD ने अध्ययन का इफेक्ट साइज 0.63 दर्ज किया, जिसे बड़ा प्रभाव माना गया है।
ट्यूटरों को AI से कैसे मदद मिली?
रिपोर्ट में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के ‘ट्यूटर कोपायलट’ AI टूल का उदाहरण दिया गया है। अमेरिका में लगभग 900 ट्यूटर्स ने 1,800 छात्रों को पढ़ाने के लिए इसका इस्तेमाल किया। इसके कारण छात्रों की उपस्थिति में औसतन 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। खासतौर पर कम अनुभव वाले ट्यूटर्स के छात्रों की सफलता दर में 9 प्रतिशत और पहले कम क्वालिटी रेटिंग वाले ट्यूटर्स के छात्रों की सफलता में 7 प्रतिशत सुधार देखा गया।
AI ट्यूटर और सामान्य चैटबॉट में क्या फर्क है?
रिपोर्ट बताती है कि सामान्य चैटबॉट केवल सवालों के जवाब दे सकते हैं, जबकि AI ट्यूटर विशेष रूप से छात्रों की जरूरत के अनुसार जानकारी, उदाहरण और फीडबैक प्रदान करते हैं। यह जरूरी है कि AI ट्यूटर को सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए सही तरीके से डिजाइन किया जाए।
क्या AI टीचर की जगह ले सकता है?
रिपोर्ट के अनुसार, AI ट्यूटर का मतलब यह नहीं है कि वे टीचर्स की जगह ले सकते हैं। AI का उपयोग शिक्षकों और ट्यूटर्स की सहायता के लिए किया जा सकता है, जिससे उनकी पढ़ाने की क्षमता और छात्रों का सीखने का अनुभव बेहतर होता है।
लेखिका के बारे में
यह रिपोर्ट सपना यादव ने लिखी है, जो TV9 भारतवर्ष डिजिटल में असिस्टेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। उनके पास 4 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से BA Hons. हिस्ट्री की डिग्री ली है, इसके बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से टीवी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और मास्टर्स किया है। इसके अलावा गुरु जम्बेश्वर साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स डिग्री हासिल की है। वे एजुकेशन डेस्क पर काम कर रही हैं और स्टूडेंट्स के लिए करियर, बोर्ड परीक्षाओं, नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी खबरें कवर करती हैं।
यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है?
शिक्षा के क्षेत्र में AI का सही उपयोग छात्रों की सीखने की क्षमता को बढ़ा सकता है। OECD रिपोर्ट से पता चलता है कि AI ट्यूटर पारंपरिक शिक्षा के मुकाबले बेहतर परिणाम दे सकते हैं, लेकिन इसकी सफलता सही डिजाइन और इस्तेमाल पर निर्भर है। यह जानकारी शिक्षकों, छात्रों और शिक्षा नीति निर्माताओं के लिए अहम साबित हो सकती है।
स्रोत: tv9hindi.com





टिप्पणियाँ
इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।