Bharat Vistaar
शनिवार, 31 अक्टूबर 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
श्वेता शाह ने साझा की फेफड़ों को डिटॉक्स करने वाली हर्बल ड्रिंक की रेसिपीयोगी आदित्यनाथ ने वाराणसी-नई दिल्ली वंदे भारत स्लीपर समेत तीन ट्रेनों को हरी झंडी दिखाईसंजय गुप्ता के निधन पर बॉलीवुड सितारों ने जताया शोक, सुनील शेट्टी और सोनू सूद ने याद किए पलUP Board कॉपियों का मूल्यांकन 18 मार्च से शुरू, कड़े निर्देश जारीअहोई अष्टमी पर स्याहू माला पहनने-उतारने के नियम और महत्वCSK में MS धोनी के बैटिंग कोच बनने की संभावना, खाली रखा गया पदजाकिर नाइक ने तालिबान की लड़कियों की शिक्षा पर पाबंदी का बचाव कियासंजय गुप्ता की चार अधूरी फिल्मों का खुलासा, टाइगर श्रॉफ की थी योजनाNBEMS ने NEET-PG 2026 का रिजल्ट घोषित किया, यहां चेक करेंचेतेश्वर पुजारा ने कुलदीप यादव के कम मौके मिलने का कारण बताया
विज्ञापन
Leaderboard Banner
Leaderboard Banner

INS विक्रांत पर पहली बार राफेल मरीन की सफल लैंडिंग, नौसेना को नई ताकत

INS विक्रांत पर पहली बार राफेल मरीन की सफल लैंडिंग हुई, जिससे भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत बढ़ेगी।

INS विक्रांत पर पहली बार राफेल मरीन की सफल लैंडिंग, नौसेना को नई ताकत

INS विक्रांत पर राफेल मरीन की पहली सफल लैंडिंग

29 अक्टूबर को भारतीय नौसेना के स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत के डेक पर पहली बार राफेल मरीन लड़ाकू विमान ने सफल लैंडिंग की। यह पहली कोशिश में ही अरेस्टर वायर को पकड़कर सुरक्षित उतरा। यह घटना भारतीय नौसेना की समुद्री युद्ध क्षमता के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई है।

लैंडिंग की चुनौतियां और सफलता

एयरक्राफ्ट कैरियर पर लड़ाकू विमान उतारना बहुत कठिन होता है क्योंकि पायलट को सीमित जगह, सही गति और सटीक कोण के साथ लैंडिंग करनी पड़ती है। इस दौरान राफेल मरीन ने अपने टेल हुक की मदद से अरेस्टर वायर को सफलतापूर्वक पकड़ा और सुरक्षित रूप से डेक पर रुक गया। इस परीक्षण के सफल होने से भारत के कैरियर आधारित लड़ाकू विमान संचालन की दिशा में अहम प्रगति हुई है।

भारत का 63,000 करोड़ का राफेल मरीन सौदा

भारत ने फ्रांस से 26 राफेल मरीन लड़ाकू विमान खरीदने का समझौता किया है, जिसकी कीमत लगभग 63,000 करोड़ रुपये है। इसमें 22 सिंगल-सीटर और 4 ट्विन-सीटर विमान शामिल हैं। इन विमानों को INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर से संचालित किया जाएगा।

राफेल मरीन में आधुनिक AESA रडार और SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम है, जो इसे दुश्मन के विमानों और समुद्री या जमीनी ठिकानों पर हमला करने में सक्षम बनाता है। इसकी मारक क्षमता Meteor और MICA मिसाइलों से बढ़ती है।

अभी और परीक्षण बाकी, नौसेना में शामिल होने का इंतजार

हालांकि पहली लैंडिंग सफल रही, लेकिन राफेल मरीन को नौसेना में ऑपरेशनल घोषित करने से पहले कई और परीक्षण करने होंगे। इसमें विभिन्न समुद्री और मौसम की परिस्थितियों में लैंडिंग, टेकऑफ, हथियारों के साथ उड़ान और एयरक्राफ्ट कैरियर के हैंगर में विमान की आवाजाही शामिल है।

भारत को ये 26 विमान 2028 से 2030 के बीच मिलने की उम्मीद है। INS विक्रांत पर पहली सफल लैंडिंग नौसेना के लिए एक बड़ा कदम है, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की हवाई और समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी।

मुख्य तथ्य

  • 29 अक्टूबर को INS विक्रांत पर पहली बार राफेल मरीन की सफल लैंडिंग हुई।
  • भारत ने 63,000 करोड़ रुपये में फ्रांस से 26 राफेल मरीन विमान खरीदे हैं।
  • राफेल मरीन में AESA रडार, SPECTRA सिस्टम और Meteor, MICA मिसाइलें शामिल हैं।
  • नौसेना में शामिल करने से पहले कई और समुद्री परीक्षण बाकी हैं।

स्रोत: hindi.asianetnews.com

यह खबर शेयर करें
स
संपादकीय टीम · Bharat Vistaar

Bharat Vistaar की संपादकीय टीम।

संपादकीय टीम की और खबरें →

टिप्पणियाँ

इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।