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आईडीबीआई बैंक के विनिवेश पर वित्त मंत्री सीतारमण और राहुल गांधी के बीच विवाद

आईडीबीआई बैंक के विनिवेश को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और राहुल गांधी के बीच तीखा विवाद जारी है।

आईडीबीआई बैंक के विनिवेश पर वित्त मंत्री सीतारमण और राहुल गांधी के बीच विवाद

नई दिल्ली, 30 अक्टूबर। आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक विनिवेश को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच सियासी विवाद तेज हो गया है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस फैसले की आलोचना की, वहीं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उनके आरोपों का कड़ा जवाब दिया है।

मुख्य तथ्य

  • राहुल गांधी ने आईडीबीआई बैंक के मुनाफे में होने के बावजूद बिक्री पर सवाल उठाए।
  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर राजनीतिक दबाव का आरोप लगाया।
  • एनडीए सरकार ने बैंक को पुनर्जीवित करने का दावा किया है।
  • विनिवेश के बाद बैंक में सरकार की हिस्सेदारी घटकर 34 प्रतिशत रह जाएगी।
  • राहुल गांधी ने आरक्षण और सेवा शर्तों पर असर की चिंता जताई।

राहुल गांधी ने उठाए सवाल

राहुल गांधी ने आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों को लिखे पत्र में कहा कि पिछले साल संसद में उनसे मिले कर्मचारियों ने मुनाफे में चल रहे बैंक को बेचने पर सवाल किया था। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि सात साल पहले घाटे में चल रहा आईडीबीआई अब 9,000 करोड़ रुपए से अधिक मुनाफा कमा रहा है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय बैंक कर्मचारियों को दिया।

राहुल गांधी ने कहा कि सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पास बैंक की लगभग 95 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो बिक्री के बाद घटकर लगभग 34 प्रतिशत रह जाएगी। उन्होंने निजीकरण से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण और कर्मचारियों की सेवा शर्तों पर असर होने की आशंका जताई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मजबूत सार्वजनिक क्षेत्र में विश्वास रखती है और सार्वजनिक बैंक केवल परिसंपत्तियां नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण के उपकरण हैं।

निर्मला सीतारमण का जवाब और आरोप

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी के आरोपों का कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने कांग्रेस पर बैंकों और वित्तीय संस्थानों का राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। सीतारमण ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में बैंकों पर राजनीतिक प्रभाव था, जिसमें बड़े कारोबारी समूहों को ऋण दिए गए जो बाद में एनपीए बन गए।

“एनडीए सरकार ने पेशेवर प्रबंधन, विवेकपूर्ण नीतियों और 25,000 करोड़ रुपए से अधिक के पुनर्पूंजीकरण के जरिए आईडीबीआई बैंक को पुनर्जीवित किया। बैंक अब विकास के अगले चरण में प्रवेश करने के लिए तैयार है और इसके रणनीतिक पुनर्गठन की पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार की गई है।”

सीतारमण ने कहा कि अब बैंकिंग व्यवस्था में “फोन बैंकिंग” और राजनीतिक प्रभाव के आधार पर ऋण देने का दौर खत्म हो चुका है। उन्होंने बताया कि आम लोगों को आज ऋण अधिक आसानी से उपलब्ध है और बैंक कर्मचारियों पर राजनीतिक दबाव डालकर ऋण मंजूर कराने जैसी प्रथाएं समाप्त हो चुकी हैं।

विनिवेश प्रक्रिया और सरकारी पक्ष

वित्त मंत्री ने बताया कि आईडीबीआई बैंक का पुनर्पूंजीकरण 25,000 करोड़ रुपए से अधिक का हुआ है, जिससे इसे संकट से बाहर निकाला गया। उन्होंने कहा कि बैंक का रणनीतिक पुनर्गठन पूरी तरह निर्धारित नियमों के अनुसार किया जा रहा है। सरकार ने इस मुद्दे पर अपनी स्थिति पहले ही स्पष्ट कर दी है और कांग्रेस के सवाल तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।

स्रोत: kharinews.com

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संपादकीय टीम · Bharat Vistaar

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