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मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026
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करवा चौथ 2026: करवा बदलने की परंपरा और उसके नियम क्या हैं?

करवा चौथ 2026 पर सुहागिन महिलाएं करवा बदलती हैं, यह परंपरा प्रेम व मंगलकामना का प्रतीक है और इसके कुछ नियम भी हैं।

करवा चौथ 2026: करवा बदलने की परंपरा और उसके नियम क्या हैं?

करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। 29 अक्टूबर 2026 को यह व्रत रखा जाएगा, जिसमें महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। इस व्रत में करवा बदलने की परंपरा भी निभाई जाती है, जिसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है।

करवा चौथ का व्रत और पूजा

करवा चौथ हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य तथा वैवाहिक सुख की कामना करती हैं। दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलने की परंपरा होती है।

करवा बदलने की परंपरा का महत्व

करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं आपस में करवा बदलती हैं, जिसे कई स्थानों पर करवा फेरना भी कहा जाता है। यह रस्म आपसी प्रेम, सौहार्द, सम्मान और मंगलकामना का प्रतीक है। महिलाओं द्वारा एक-दूसरे को करवा देना और वापस लेना इस बात का संकेत है कि वे एक-दूसरे के सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।

करवा बदलने के नियम

करवा बदलते समय कुछ नियमों का पालन करना जरूरी होता है। पूजा के दौरान या कथा के समय करवा फेरने की रस्म निभाई जाती है। करवा हमेशा साफ और पूजा के योग्य होना चाहिए। अगर मिट्टी के करवे का उपयोग हो रहा हो, तो उसे सावधानी से संभाल कर रखना चाहिए ताकि वह टूटे नहीं।

करवा बदलते समय दूसरी महिला के प्रति सम्मान और शुभभाव रखना आवश्यक होता है। इस रस्म का उद्देश्य एक-दूसरे के सुखी दांपत्य जीवन की कामना करना है। कई परिवारों में करवे के साथ मिठाई, फल, रुपये या अन्य पूजन सामग्री भी दी जाती है। इसके अलावा पूजा और व्रत की शुद्धता बनाए रखने के लिए महिलाएं स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा करती हैं।

क्या हर महिला के लिए करवा बदलना जरूरी है?

करवा बदलने की परंपरा कई परिवारों में तो निभाई जाती है, लेकिन इसे हर जगह अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं माना जाता। कुछ महिलाएं अपनी सहेलियों, पड़ोस की या परिवार की अन्य सुहागिन महिलाओं के साथ यह रस्म करती हैं, जबकि कुछ परिवारों में इसका चलन नहीं होता। यदि आपके घर में यह परंपरा है तो श्रद्धा के साथ निभाएं, अन्यथा इसे न करने पर परेशान होने की आवश्यकता नहीं है।

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संपादकीय टीम · Bharat Vistaar

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