महाराष्ट्र को नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के फैसले के तहत उकाई बांध से 5 टीएमसी पानी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। यह फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आग्रह के बाद लिया गया।
फडणवीस के आग्रह पर फैसला
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नर्मदा जल विवाद को लेकर जोरदार आग्रह किया था। इसके बाद नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की उच्च स्तरीय समीक्षा समिति की बैठक में यह निर्णय अंतिम रूप दिया गया। जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने पानी छोड़ने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए तुरंत निर्देश जारी किए।
न्यायाधिकरण के निर्णय का आधार
नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण ने महाराष्ट्र को कुल 10 टीएमसी पानी देने का हिस्सा तय किया था। इसमें से 5 टीएमसी पानी नर्मदा-तापी डायवर्जन नहर योजना के जरिए और 5 टीएमसी पानी सीधे उकाई बांध से प्राप्त किया जाना था।
सीएम फडणवीस का केंद्रीय मंत्री अमित शाह के साथ समन्वय
देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि पानी छोड़ने का निर्णय पहले ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ एक संयुक्त बैठक में लिया गया था। उन्होंने नर्मदा परियोजना में महाराष्ट्र की जिम्मेदारियों के बारे में भी जानकारी दी और राज्य का पक्ष मजबूती से रखा।
महाराष्ट्र का अधिकार दोहराया
मुख्यमंत्री ने उकाई बांध से महाराष्ट्र को उसके निर्धारित जल हिस्से का अधिकार दोहराया। उन्होंने कहा, "केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई पिछली बैठक के अनुसार महाराष्ट्र को उकाई बांध से अपने हिस्से का पानी मिलना चाहिए। हमने इसके लिए केंद्रीय मंत्री और गुजरात के मुख्यमंत्री से औपचारिक स्वीकृति मांगी थी।"
जल शक्ति मंत्री ने अधिकार की पुष्टि की
महाराष्ट्र के आग्रह के बाद केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने राज्य के अधिकार की पुष्टि की। उन्होंने आवश्यक निर्देश जारी कर राज्य को उसका जल हिस्सा तत्काल जारी करने के आदेश दिए।
स्रोत: deshbandhu.co.in





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