सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट के फैसले को पलटा
सुप्रीम कोर्ट ने मोकामा के विधायक अनंत सिंह की जमानत रद्द कर दी है। कोर्ट ने 1 दिसंबर तक अनंत सिंह से सरेंडर करने को कहा है। इस फैसले से पहले पटना हाई कोर्ट ने उन्हें जमानत दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे गलत बताया।
हाई कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को नजरअंदाज किया
जस्टिस एम.एम. सुंदेश और जस्टिस पी.वी. वराले की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि पटना हाई कोर्ट ने जमानत देते समय अपराध की गंभीर प्रकृति और अनंत सिंह के लंबे आपराधिक इतिहास को नजरअंदाज किया था। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाई।
मृतक के पोते की याचिका पर सुनवाई
अनंत सिंह की रिहाई को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। यह याचिका मृतक दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने दायर की थी। याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि अनंत सिंह ने जमानत के लिए हलफनामे में अपने खिलाफ दर्ज 67 आपराधिक मामलों की पूरी जानकारी छुपाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस तथ्य को गंभीरता से लिया और हाई कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया।
दुलारचंद यादव कौन थे?
दुलारचंद यादव बाढ़ में रहने वाले थे और उनका जन्म मोकामा के तारतर गांव में हुआ था। उनकी हत्या भी इसी गांव में हुई। 1990 के दशक में वे राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के संपर्क में आए और मोकामा विधानसभा से चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। वे बाहुबली अनंत सिंह के करीबी रहे, लेकिन 2025 के चुनाव में वे पीयूष प्रियदर्शी का समर्थन कर रहे थे, जिससे अनंत सिंह उनसे नाराज थे।
विधानसभा चुनाव के दौरान हुई हत्या
दुलारचंद यादव की हत्या अक्टूबर 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान हुई थी। मोकामा के टाल इलाके में चुनाव प्रचार के दौरान अनंत सिंह और जन सुराज पार्टी के समर्थकों के काफिले आमने-सामने आ गए थे। इस विवाद और हिंसा में 75 वर्षीय दुलारचंद यादव को गोली लगी और गाड़ी से कुचलकर उनकी मौत हो गई। इसके बाद अनंत सिंह पर आरोप लगे। जेल में रहते हुए उन्होंने चुनाव जीता था।
स्रोत: hindi.webdunia.com





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