इंदौर में RSS का चरैवेति एकत्रीकरण
इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का चरैवेति एकत्रीकरण ध्वजारोहण और संघ प्रार्थना के साथ शुरू हुआ। इसके बाद स्वयंसेवकों ने सामूहिक योग प्रदर्शन किया। इंदौर विभाग के कार्यवाह रित्नेश रघुवंशी ने शताब्दी वर्ष के दौरान विभाग में आयोजित कार्यक्रमों की रिपोर्ट प्रस्तुत की।
संघ की 100 वर्षों की यात्रा और समाज सेवा
अतुल लिमये ने बताया कि संघ की 100 वर्षों की यात्रा स्वयंसेवकों के कठोर परिश्रम का परिणाम है। शाखा के माध्यम से ऐसे स्वयंसेवक तैयार हुए हैं जो अपना जीवन देश और समाज के लिए समर्पित करते हैं। उन्होंने बताया कि संघ ने संगठनात्मक विस्तार के साथ समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कई रचनात्मक गतिविधियां विकसित की हैं।
सेवा विभाग समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलता है, जबकि प्रचार विभाग राष्ट्रीय विचारों के प्रसार के लिए विभिन्न माध्यमों से सक्रिय है। जागरण पत्रिकाओं और राष्ट्रीय विचारों को गांवों तक पहुंचाने के लिए विश्व संवाद केंद्र काम कर रहे हैं। संपर्क विभाग समाज की सज्जन शक्ति को राष्ट्रीय कार्यों से जोड़ने का प्रयास करता है। इसके अलावा समाज की समस्याओं के समाधान के लिए छह विषयों पर आधारित गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
पंच परिवर्तन के माध्यम से सामाजिक सुधार
सह सरकार्यवाह अतुल लिमये ने कहा कि स्वयंसेवक समाज के आचरण में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए पंच परिवर्तन के संकल्प के साथ कार्यरत हैं। संघ की कार्यशैली में सामूहिकता, अनुशासन और व्यक्ति निरपेक्षता को खास महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि संगठन के विस्तार के बाद कार्यकर्ता संतुष्ट होकर नहीं रुकेंगे, बल्कि बेहतर कार्य करने की भावना से आगे बढ़ेंगे।
लिमये ने जोर दिया कि संगठन की पहुंच समाज के सभी वर्गों तक होनी चाहिए और कार्य की गुणवत्ता भी बनाए रखनी होगी। केवल स्वयंसेवकों का निर्माण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज के व्यवहार में बदलाव लाने के लिए समानांतर प्रयास और व्यवस्थाएं भी जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसा माहौल बनाना आवश्यक है जहां लोग देश और समाज के हित में काम करने के लिए प्रेरित हों। आस्था, आत्मीयता और सकारात्मक विचारों को बढ़ावा देने के साथ व्यवहार में बदलाव भी जरूरी है। समाज के किसी भी वर्ग के साथ विषमता का व्यवहार नहीं होना चाहिए। पंच परिवर्तन का संकल्प इसी दिशा में सकारात्मक आचरण को बढ़ावा देने का माध्यम है।
सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं के बीच समन्वय जरूरी
अतुल लिमये ने कहा कि देश और समाज के सामने मौजूद चुनौतियों के समाधान के लिए शासन और समाज दोनों को मिलकर काम करना होगा। इसके लिए सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में काम करने वाली 10 लाख से अधिक संस्थाओं के बीच संवाद और समन्वय स्थापित करना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि इन संस्थाओं की क्षमता और कार्यकुशलता के अनुसार उन्हें जिम्मेदारी देना, प्रशिक्षण उपलब्ध कराना और बेहतर कार्यशैली विकसित करना जरूरी है। संपूर्ण समाज को साथ लेकर चलने का स्वभाव बनाना होगा। उन्होंने भारतीय जीवन मूल्यों और धर्म आधारित व्यवस्थाओं को मजबूत करने तथा समाज में संस्कार देने वाली व्यवस्थाओं के निर्माण पर भी जोर दिया।
लिमये ने कहा कि संघ का कार्य कठिन और परिश्रमसाध्य है, लेकिन स्वयंसेवकों ने इसके लिए वीर व्रत धारण किया है। वे उपेक्षा, विरोध, उत्साह और सहयोग जैसी विभिन्न परिस्थितियों के बीच भी अपने कार्य को प्रभावी बनाते हुए आगे बढ़ रहे हैं।
स्रोत: hindi.webdunia.com





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