Bharat Vistaar
शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
धन प्राप्ति के लिए महालक्ष्मी और कुबेर मंत्रों का महत्वबद्रीनाथ से लौट रहा हेलीकॉप्टर क्रैश, छह सवारियों के लिए रेस्क्यू जारीविधान परिषद चुनाव में भाजपा को झटका, अमित शाह ने लखनऊ में कार्यकर्ताओं को जोश दियाशुभेंदु अधिकारी ने बंगाल में राजनीतिक हिंसा पीड़ितों को नौकरी देने का प्रस्ताव दियाबेसन की पूड़ी फूली-फूली बनाने के आसान 5 टिप्स और सही तरीकागौतम गंभीर ने टी20 खिलाड़ियों को बताया भविष्य की रणनीति का आधारअहोई अष्टमी 2026: चांदी की स्याहू माला पहनने का धार्मिक महत्व और परंपरामऊ पुलिस ने 10.78 लाख के पटाखों के साथ दीपक कुमार को किया गिरफ्तारडिंपल यादव ने PDA की जीत को बताया उत्तर प्रदेश में बदलाव की नींवनिर्मला सीतारमण ने IDBI बैंक निजीकरण पर राहुल गांधी के बयान का जवाब दिया
विज्ञापन
Leaderboard Banner
Leaderboard Banner

अहोई अष्टमी 2026: चांदी की स्याहू माला पहनने का धार्मिक महत्व और परंपरा

अहोई अष्टमी 2026 पर माताएं संतान की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए चांदी की स्याहू माला पहनती हैं, जिसमें हर साल नए दाने जोड़े जाते हैं।

अहोई अष्टमी 2026: चांदी की स्याहू माला पहनने का धार्मिक महत्व और परंपरा

अहोई अष्टमी 2026 पर माताएं संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए चांदी की स्याहू माला पहनती हैं।

अहोई अष्टमी और चांदी की स्याहू माला की परंपरा

हिंदू धर्म में अहोई अष्टमी का व्रत विशेष रूप से माताओं द्वारा उनकी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए रखा जाता है। इस दिन महिलाएं अहोई माता की पूजा करती हैं और अपनी संतान के उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं। पूजा के दौरान चांदी की स्याहू माला पहनना एक महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा है। यह माला आस्था और मां के प्रेम का प्रतीक मानी जाती है, जो संतान की सुरक्षा और परिवार की समृद्धि का संकेत देती है।

अहोई अष्टमी 2026 कब मनाई जाएगी?

पंचांग के अनुसार, अहोई अष्टमी का व्रत साल 2026 में 1 नवंबर, रविवार को रखा जाएगा। इस दिन माताएं व्रत रखकर अपनी संतान की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना करेंगी।

स्याहू माला क्या होती है?

स्याहू माला चांदी के छोटे-छोटे दानों से बनी होती है, जिनमें अहोई माता का प्रतीकात्मक लॉकेट भी शामिल होता है। ये दाने लाल धागे या कलावे में पिरोए जाते हैं। धार्मिक दृष्टि से चांदी एक शुभ और पवित्र धातु मानी जाती है, जबकि लाल धागा आस्था और मांगलिकता का प्रतीक है। इस माला को केवल आभूषण नहीं, बल्कि मां की संतान के प्रति श्रद्धा और मंगलकामना समझा जाता है।

हर साल माला में नए दाने जोड़ने का रहस्य

अहोई अष्टमी पर महिलाओं द्वारा अपनी स्याहू माला में हर वर्ष एक या दो नए चांदी के दाने जोड़े जाते हैं। यह परंपरा संतान की उम्र, प्रगति और परिवार की खुशहाली बढ़ाने का प्रतीक है। जैसे-जैसे माला के दाने बढ़ते हैं, वैसे-वैसे मां की संतान के लिए मंगलकामनाएं भी बढ़ती हैं। यह रीति नए साल में बच्चे के उज्जवल भविष्य की कामना भी दर्शाती है।

अहोई अष्टमी पूजा में स्याहू माला का महत्व

स्याहू माला पहनने का मुख्य उद्देश्य मां अहोई से संतान की रक्षा और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करना है। कई परिवारों में यह माला पूजा का अनिवार्य हिस्सा होती है। महिलाएं इसे पूजा के दौरान माता के सामने रखती हैं और बाद में गले में पहनती हैं। कुछ घरों में माला पहले से पहन ली जाती है और पूजा के समय माता का ध्यान किया जाता है।

"स्याहू माला संतान की सुरक्षा, दीर्घायु और परिवार की खुशहाली का प्रतीक मानी जाती है।"

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। TV9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है।

स्रोत: tv9hindi.com

यह खबर शेयर करें
स
संपादकीय टीम · Bharat Vistaar

Bharat Vistaar की संपादकीय टीम।

संपादकीय टीम की और खबरें →

टिप्पणियाँ

इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।