उत्तराखंड के चमोली जिले में बद्रीनाथ धाम से लौट रहे ट्रांस भारत एविएशन के हेलीकॉप्टर VT-HCX के क्रैश होने की जानकारी मिली है। यह घटना 1 मई की दोपहर 1:12 बजे हुई जब हेलीकॉप्टर बद्रीनाथ से देहरादून के लिए उड़ान भर रहा था। इस हादसे में छह लोग सवार थे और खराब मौसम के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधाएं आ रही हैं।
मुख्य तथ्य
- हेलीकॉप्टर बद्रीनाथ से देहरादून के लिए उड़ान भर रहा था।
- यह जोशीमठ के पास चाई गांव के निकट क्रैश हुआ।
- हेलीकॉप्टर में कुल छह लोग सवार थे।
- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घायलों को एयरलिफ्ट करने के निर्देश दिए।
- प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और एसडीआरएफ संयुक्त रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं।
हेलीकॉप्टर का आखिरी संपर्क
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हेलीकॉप्टर का अंतिम संपर्क जोशीमठ के सामने हाथीपहाड़ के पीछे टॉप पर स्थित आर्मी पोस्ट के आसपास हुआ था। इसके बाद से हेलीकॉप्टर से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। इस क्षेत्र में खराब मौसम के कारण बचाव कार्य में कठिनाइयां आ रही हैं।
प्रशासन और मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
चमोली प्रशासन ने बताया कि रेस्क्यू टीमों को तुरंत मौके पर भेजा गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक पोस्ट में कहा, "चाई गांव, जोशीमठ के निकट हेलीकॉप्टर के क्रैश होने की दुर्भाग्यपूर्ण सूचना प्राप्त हुई है। जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग, एसडीआरएफ द्वारा संयुक्त रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।"
उन्होंने यह भी कहा कि वे पूरे घटनाक्रम की निगरानी कर रहे हैं और गंभीर रूप से घायल यात्रियों को बेहतर इलाज के लिए तुरंत एयरलिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने यात्रियों की सुरक्षित वापसी के लिए ईश्वर से प्रार्थना भी की।
बद्रीनाथ धाम का महत्व
बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड के चमोली जिले में भगवान विष्णु को समर्पित एक प्रमुख हिंदू तीर्थस्थल है। यह चार धामों में से एक है और इसे 'भू-वैकुंठ' भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु ने यहां तपस्या की थी, और माता लक्ष्मी ने उनकी रक्षा के लिए 'बद्री' के पेड़ का रूप धारण किया था।
यह स्थल ऋषि नर और नारायण के तपस्थली के रूप में भी जाना जाता है। बर्फबारी के कारण यह मंदिर साल के छह महीने (अप्रैल-मई से नवंबर तक) ही खुलता है, और सर्दियों में मूर्ति को जोशीमठ ले जाया जाता है।
स्रोत: deshbandhu.co.in





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