केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में अकाउंटेंसी और गणित विषय के लिए कैलकुलेटर के उपयोग की अनुमति देने का मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस संबंध में दायर जनहित याचिका (PIL) पर 17 मई 2023 को सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने केंद्र सरकार, CBSE, नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) और PARAKH (नेशनल असेसमेंट सेंटर) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
कैलकुलेटर की अनुमति की मांग और कोर्ट का रुख
दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि CBSE 12वीं बोर्ड परीक्षा में अकाउंटेंसी और गणित के छात्रों को बेसिक, नॉन-प्रोग्रामेबल कैलकुलेटर के इस्तेमाल की अनुमति मिलनी चाहिए। कोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव साम्ब्रे और जस्टिस संजय शर्मा शामिल हैं, ने इस मामले में जवाब तलब किया है। CBSE के वकील ने कोर्ट को बताया कि इस विषय पर विचार किया जा रहा है और उन्होंने जवाब देने के लिए समय मांगा है।
याचिका में क्या कहा गया है?
याचिका में कहा गया है कि CBSE द्वारा कैलकुलेटर पर प्रतिबंध लगाना मनमाना है और यह भारत के संविधान के आर्टिकल 14 का उल्लंघन करता है। खासतौर पर तब जब CBSE की अपनी करिकुलम कमेटी ने नवंबर 2024 में 12वीं अकाउंटेंसी की परीक्षाओं में बेसिक कैलकुलेटर की अनुमति देने का प्रस्ताव स्वीकृत किया था। यह प्रस्ताव दिसंबर 2024 में CBSE की गवर्निंग बॉडी के सामने रखा गया, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया और न ही नोटिफाई किया गया।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि लंबी कैलकुलेशन में अधिक समय लगने के कारण छात्रों को अकाउंटेंसी और गणित जैसे विषयों में अपनी अवधारणात्मक समझ दिखाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।
अन्य मांगें और स्थिति
याचिका में CBSE से यह भी कहा गया है कि वे गणित विषय में भी कैलकुलेटर की अनुमति दें और डिस्कैलकुलिया से प्रभावित छात्रों के अलावा अन्य दिव्यांग छात्रों के लिए भी कैलकुलेटर सुविधा बढ़ाने हेतु एक विशेषज्ञ समिति का गठन करें। 17 अगस्त की एक रिप्रेजेंटेशन में इस प्रस्ताव को लागू करने और उचित जवाब देने की मांग की गई थी, लेकिन अभी तक इसका कोई जवाब नहीं मिला है।
इस मामले की सुनवाई जारी है और अब विभिन्न पक्षों के जवाब आने के बाद कोर्ट निर्णय लेगा।
स्रोत: tv9hindi.com





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