देहरादून। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित केदारताल झील के टूटने की स्थिति में मात्र 45 मिनट में बाढ़ की विनाशकारी लहर गंगोत्री धाम तक पहुंच सकती है। यह जानकारी राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (NIH), रुड़की के वैज्ञानिकों के एक ताजा अध्ययन में सामने आई है। शोध के अनुसार, केदारताल का प्राकृतिक बांध टूटने पर बाढ़ का पानी केदारगंगा से होते हुए भागीरथी नदी तक और ऋषिकेश तक भारी तबाही मचा सकता है।
मुख्य तथ्य
- केदारताल झील 2025 तक 1,33,823.1 वर्गमीटर क्षेत्र में फैल जाएगी।
- झील में लगभग 1.56 अरब लीटर पानी भरा है।
- बाढ़ की लहर 45 मिनट में गंगोत्री पहुंच जाएगी।
- बाढ़ का प्रवाह 15 मिनट में 2,800 घनमीटर प्रति सेकेंड तक पहुंच सकता है।
- घाटी के संकरे हिस्सों में पानी की ऊंचाई 20 मीटर तक हो सकती है।
केदारताल झील का बढ़ता आकार और खतरा
राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान की 20 वैज्ञानिकों की टीम ने सितंबर 2026 में सर्वे किया। उनके अनुसार, केदारताल झील का क्षेत्रफल 1990 में 64,455.86 वर्गमीटर था, जो 2020 में बढ़कर 1,05,772.99 वर्गमीटर और 2025 तक 1,33,823.1 वर्गमीटर हो जाएगा। पिछले 35 वर्षों में झील का आकार 107.5% बढ़ा है। झील की लंबाई 600 मीटर और चौड़ाई 200 मीटर है, जबकि इसकी गहराई 13 मीटर तक है।
झील में लगभग 1.56 अरब लीटर पानी जमा हो चुका है, जो किसी भी समय प्राकृतिक बांध टूटने की स्थिति पैदा कर सकता है। शोधकर्ता डॉ. लवकुश कुमार पटेल ने बताया कि ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ते तापमान के कारण हिमनद तेज़ी से पिघल रहे हैं, जिससे झीलों पर दबाव बढ़ रहा है।
बाढ़ की तीव्रता और प्रभाव क्या होंगे?
टू-डायमेंशनल हाइड्रोडायनामिक मॉडल के अनुसार, बांध टूटने के 15 मिनट के भीतर बाढ़ का प्रवाह 2,800 घनमीटर प्रति सेकेंड तक पहुंच सकता है। यह बाढ़ की लहर केदारगंगा घाटी में 20 किमी की दूरी तय कर 45 मिनट में गंगोत्री तक जाएगी। गंगोत्री पहुंचने पर भी पानी का प्रवाह 1,450 घनमीटर प्रति सेकेंड रहेगा।
घाटी के संकरे हिस्सों में बाढ़ का पानी 20 मीटर तक गहरा हो सकता है। वहीं, संगम के आसपास निचले इलाकों में जलभराव 0 से 15 मीटर के बीच हो सकता है। इससे पुल, बुनियादी ढांचे और बस्तियों को भारी नुकसान पहुंचने का खतरा है।
"बढ़ते तापमान और ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमनद तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे हिमनद झीलों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।" – डॉ. लवकुश कुमार पटेल
यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है?
केदारताल झील का बढ़ता आकार और संभावित टूटने से गंगोत्री और आसपास के इलाकों में भारी बाढ़ आ सकती है। इससे न केवल स्थानीय बस्तियों को खतरा होगा, बल्कि धार्मिक स्थलों और पर्यटकों के लिए भी जोखिम बढ़ जाएगा। इस अध्ययन से प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को समय रहते सावधानी बरतने और बचाव की तैयारी करने में मदद मिलेगी। फिलहाल यह शोध एक चेतावनी के रूप में सामने आया है, और इसके आधार पर आगे की जांच और सुरक्षा उपायों पर काम होना आवश्यक है।
स्रोत: tv9hindi.com





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