दिवाली का त्योहार इस वर्ष 8 नवंबर को मनाया जाएगा। इस पावन अवसर पर घर के मुख्य द्वार पर मां लक्ष्मी के पैरों के निशान बनाने की प्राचीन परंपरा निभाना बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह कदम मां लक्ष्मी का स्वागत करने का प्रतीक माना जाता है और इसे सही विधि से करने पर घर में सुख-समृद्धि आती है।
मुख्य द्वार पर मां लक्ष्मी के चरण चिह्न बनाने का धार्मिक महत्व
दिवाली की रात को मां लक्ष्मी के छोटे-छोटे पैरों के निशान घर के मुख्य द्वार पर बनाना शुभ होता है। ऐसा माना जाता है कि मां लक्ष्मी के चरण घर के अंदर की ओर होने चाहिए, ताकि वह सीधे घर के भीतर प्रवेश करें। इस परंपरा से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सकारात्मक वातावरण बनता है। कई लोग इसे श्रद्धा और विश्वास के साथ करते हैं, जिससे माता का आशीर्वाद स्थायी रूप से परिवार पर बना रहता है।
चरण चिह्न बनाने से घर में बरकत कैसे आती है?
मां लक्ष्मी के पैरों के निशान बनाने का संबंध घर में धन-वैभव और संपन्नता से जोड़ा जाता है। चावल, आटा या सिंदूर से बनाए गए ये चरण माता को प्रसन्न करते हैं। धार्मिक मान्यताएं बताती हैं कि जिन घरों में साफ-सफाई के साथ ये निशान बनाए जाते हैं, वहां पैसों की कमी नहीं होती। यह प्रतीक है कि घर के द्वार धन की देवी के स्वागत के लिए खुले हैं। इस विधि से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और अन्न-धन का भंडार बढ़ता रहता है।
चरण चिह्न बनाने के समय ध्यान रखने योग्य बातें
- चरण कभी भी घर के बाहर की ओर नहीं बनाए जाने चाहिए, इससे माता के घर से जाने का संकेत माना जाता है।
- निशान हमेशा घर के अंदर की दिशा की ओर ही बनाएं, ताकि धन का आगमन घर के भीतर हो।
- चरण बनाने के लिए केवल साफ सामग्री का उपयोग करें, जिससे पवित्रता बनी रहे।
मां लक्ष्मी की पूजा और उनके स्वागत के लिए यह विधान बहुत विधिपूर्वक और पवित्रता के साथ किया जाता है। जो लोग इसे सही ढंग से अपनाते हैं, उनके घर में खुशहाली और सुख-शांति बनी रहती है।
नोट: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता। सुझाव के लिए astropatri.com से संपर्क करें।
स्रोत: tv9hindi.com





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