1 नवंबर को अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। इस दिन माताएं निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को अहोई माता की पूजा के बाद तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। हालांकि, कई बार खराब मौसम या बादलों के कारण तारे दिखाई नहीं देते, तो ऐसी स्थिति में व्रत कैसे खोलना चाहिए, यह जानना जरूरी है।
मुख्य बिंदु
- अहोई अष्टमी पर व्रत का पारण शाम को तारों को अर्घ्य देने के बाद होता है।
- तारे न दिखने पर पंचांग में बताए गए समय के अनुसार पूजा और पारण कर सकते हैं।
- कुछ परिवारों में चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।
- श्रद्धा और भावना सबसे महत्वपूर्ण होती है, इसलिए घबराना नहीं चाहिए।
- वीडियो कॉल के जरिए तारे देखने और अर्घ्य देने की परंपरा भी कुछ लोग अपनाते हैं।
अहोई अष्टमी पर तारे न दिखने पर क्या करें?
अगर मौसम खराब होने के कारण तारे नजर नहीं आ रहे हैं, तो व्रत रखने वाली महिलाएं पंचांग के अनुसार उस समय पूजा कर सकती हैं जब तारों के दर्शन का शुभ मुहूर्त होता है। इस दौरान पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके जल अर्पित करें और अहोई माता का ध्यान करें।
इसके अलावा, यदि आपके किसी परिवार सदस्य के यहां आसमान साफ है, तो वीडियो कॉल के जरिए तारे देखकर अर्घ्य देने की परंपरा भी निभाई जा सकती है।
धार्मिक मान्यताओं में पूजा के दौरान श्रद्धा और सच्चे मन से की गई प्रार्थना को सर्वोच्च महत्व दिया जाता है। इसलिए मौसम खराब होने पर निराश न होकर माता का स्मरण करें और संतान की भलाई की कामना करें।
कुछ परिवारों में चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलने की परंपरा भी है। अगर आपके यहां ऐसा प्रचलित है, तो रात 11:05 से 11:40 बजे के बीच चंद्रमा को जल अर्पित कर व्रत समाप्त कर सकते हैं।
अहोई अष्टमी का व्रत खोलने की विधि
आमतौर पर अहोई अष्टमी का व्रत शाम को तारों को अर्घ्य देने के बाद खोला जाता है। इसके लिए पहले अहोई माता की पूजा पूरी करें। फिर तारों के निकलने का इंतजार करें और जल भरे लोटे या करवे से उन्हें अर्घ्य दें।
इसके बाद अहोई माता की आरती करें और संतान की लंबी उम्र, स्वास्थ्य तथा सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। पूजा के दौरान यदि कोई भूल-चूक हुई हो तो क्षमा प्रार्थना भी करें।
पूजा समाप्ति के बाद व्रत का पारण करें। पहले जल ग्रहण करें और फिर सात्विक भोजन करके व्रत तोड़ें।
अहोई अष्टमी के लिए पूजा और अर्घ्य देने का शुभ मुहूर्त शाम 5:36 बजे से 6:54 बजे तक है। तारों को अर्घ्य देने का समय शाम 5:22 बजे से 6:00 बजे तक का माना गया है।
ध्यान दें कि विभिन्न पंचांगों में ये समय थोड़ा भिन्न हो सकता है, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग की जानकारी अवश्य लें।
स्रोत: tv9hindi.com





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