मध्य प्रदेश के बैतूल की 26 वर्षीय प्रखरश्री जैन ने न्यायिक सेवा की परीक्षा पास कर सिविल जज बनने का अवसर पाया, लेकिन इस पद पर नौकरी शुरू न करने का फैसला किया है। वे अब जैन धर्म के सिद्धांतों के अनुसार संयम और वैराग्य का जीवन अपनाकर साध्वी बनने जा रही हैं। प्रखरश्री 22 नवंबर को चार अन्य दीक्षार्थी बहनों के साथ जैन दीक्षा ग्रहण करेंगी।
प्रखरश्री जैन ने साध्वी बनने का क्यों लिया फैसला?
प्रखरश्री का मानना है कि समाज की सेवा केवल न्यायिक सेवा या वकालत के जरिए ही संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर के बताए मार्ग पर चलकर भी मानव कल्याण के लिए काम किया जा सकता है। यही सोच उन्हें आध्यात्मिक जीवन की ओर ले गई।
जैन दीक्षा क्या होती है?
जैन धर्म में दीक्षा को आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत माना जाता है। यह केवल घर-परिवार छोड़ने का नाम नहीं, बल्कि सांसारिक इच्छाओं, मोह-माया और भौतिक सुखों से दूरी बनाकर आत्मकल्याण की ओर बढ़ना है। दीक्षा लेने वाला व्यक्ति संयम, अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह जैसे सिद्धांतों को अपनाता है। दीक्षा के बाद उसका जीवन धार्मिक अनुशासन और साधना के नियमों के अनुसार चलता है।
जैन दीक्षा की प्रक्रिया कैसे होती है?
दीक्षा जीवनभर के लिए लिया जाने वाला संकल्प है। इसके लिए दीक्षार्थी को मानसिक और आध्यात्मिक रूप से तैयार होना पड़ता है। सबसे पहले व्यक्ति सांसारिक मोह-माया से अलग होकर संयम का मार्ग चुनता है। यह फैसला अपनी इच्छा और समझ के आधार पर लिया जाता है।
दीक्षा की तैयारी में जैन आचार्य या साधु-साध्वी का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण होता है, जो संयमपूर्ण जीवन और धार्मिक नियमों के बारे में बताते हैं।
दीक्षा के दौरान व्यक्ति अपने पुराने सांसारिक जीवन से विदाई लेता है और धन-संपत्ति, व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं तथा पारिवारिक मोह से ऊपर उठकर धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प करता है।
दीक्षा समारोह में अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह जैसे महाव्रतों को अपनाने की प्रतिज्ञाएं ली जाती हैं। इसके बाद व्यक्ति साधु या साध्वी के रूप में जीवन शुरू करता है।
बिनौली क्या है और इसका महत्व क्या है?
जैन समाज में दीक्षा से पहले बिनौली निकालने की परंपरा होती है, जो दीक्षार्थी के सांसारिक जीवन से विदाई का अवसर होती है। इस आयोजन में परिवार, रिश्तेदार और समाज के लोग दीक्षार्थियों का सम्मान करते हैं और उन्हें आध्यात्मिक जीवन के लिए शुभकामनाएं देते हैं।
बैतूल में प्रखरश्री जैन समेत पांच दीक्षार्थी बहनों की बिनौली निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग शामिल हुए। दीक्षा से पहले ये बहनें रंगीन कपड़ों में थीं, लेकिन दीक्षा के बाद वे सफेद कपड़े पहनकर संयम का जीवन शुरू करेंगी।
प्रखरश्री जैन कौन हैं?
प्रखरश्री जैन बैतूल की रहने वाली हैं। उन्होंने एलएलएम की पढ़ाई के दौरान गोल्ड मेडल हासिल किया और लंदन में भी एक कोर्स किया। उनकी मेहनत से उनका चयन सिविल जज पद पर हुआ था। परिवार भी उन्हें न्यायिक सेवा में आगे बढ़ते देखना चाहता था, लेकिन प्रखरश्री ने आध्यात्मिक जीवन को प्राथमिकता दी। वे जैनेश्वरी दीक्षा लेकर साध्वी बनने जा रही हैं।
स्रोत: tv9hindi.com





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