धनतेरस 2026 पर 8 नवंबर को घर में कुल 13 दीपक जलाने की परंपरा है, जो सुख-समृद्धि और सुरक्षा का प्रतीक मानी जाती है।
धनतेरस के 13 दीपकों की खास परंपरा
कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। यह पर्व इस साल 8 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वन्तरि के प्रकट होने की कथा जुड़ी है, इसलिए इसे धनतेरस कहा जाता है। इस रात घर के अलग-अलग कोनों में कुल 13 दीपक जलाने की प्राचीन परंपरा है, जिसे यम दीपम भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इन दीपकों से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और संकट का भय दूर होता है।
धनतेरस पर दीपक जलाने के प्रमुख स्थान
सबसे पहला दीपक घर के पूजा स्थान पर रखा जाता है, जो इष्ट देव को समर्पित होता है। दूसरा दीपक घर के ईशान कोण में जलाया जाता है, क्योंकि यह दिशा पवित्र और देवी-देवताओं का निवास स्थान मानी जाती है। तीसरा दीपक तुलसी के पास रखा जाता है, जहां माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु का वास माना जाता है। चौथा दीपक घर के मुख्य द्वार पर दोनों तरफ लगाया जाता है ताकि सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश कर सके और नकारात्मक ऊर्जा बाहर रहे।
दूसरे महत्वपूर्ण स्थान और दीपकों के धार्मिक महत्व
- पांचवां दीपक घर की दक्षिण दिशा में जलाया जाता है, जिसे यमराज की दिशा कहा जाता है। इसे जलाने से अकाल मृत्यु का भय कम होता है।
- छठवां दीपक घर के ब्रह्मस्थान पर रखा जाता है, जिससे घर की ऊर्जा संतुलित होती है।
- सातवां दीपक शौचालय के बाहर जलाया जाता है, ताकि नकारात्मक ऊर्जा निष्क्रिय हो जाए।
- आठवां दीपक बालकनी या छत पर लगाया जाता है।
- नौवां दीपक घर के कबाड़ स्टोर रूम के पास जलाया जाता है, जिससे घर की दरिद्रता दूर होती है।
- दसवां दीपक घर के पास चौराहे पर रखा जाता है ताकि रास्ते की बाधाएं दूर हों।
- ग्यारहवां दीपक पीपल के पेड़ के नीचे जलाया जाता है, जिससे पितरों का आशीर्वाद मिलता है।
- बारहवां दीपक बेल के पौधे के पास रखा जाता है, जो शुभ माना जाता है।
- तेरहवां और अंतिम दीपक घर की खिड़कियों के पास जलाया जाता है।
इन सभी स्थानों पर दीपक जलाने से घर के हर कोने में रोशनी फैलती है और जीवन के संकट दूर होते हैं। मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और धन की कमी नहीं होती।
धार्मिक मान्यता और जानकारी देने वाली रजनी गुप्ता का परिचय
यह जानकारी रजनी गुप्ता ने दी है, जो दिल्ली विश्वविद्यालय से संस्कृत में एमए, एमफिल (ज्योतिष) की शिक्षा प्राप्त कर चुकी हैं। उन्होंने भारतीय विद्या भवन से वास्तु शास्त्र में डिप्लोमा भी लिया है। वे अंक शास्त्र (न्यूमरोलॉजी) और टैरो कार्ड विद्या में भी पारंगत हैं। 17 वर्षों से ज्योतिष क्षेत्र से जुड़ी रजनी गुप्ता Astropatri.com से जुड़ी हैं और लोगों को सही मार्गदर्शन देने का प्रयास करती हैं। उनका अध्यात्म की ओर झुकाव रहा है और वे कविताएं लिखने तथा पेंटिंग में भी रुचि रखती हैं।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है।
स्रोत: tv9hindi.com





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