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रमा एकादशी 2026: व्रत नियम और पूजा के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें

रमा एकादशी 2026 4 नवंबर से शुरू होकर 5 नवंबर को व्रत रखा जाएगा, इस दिन भगवान विष्णु-लक्ष्मी की पूजा और व्रत नियमों का पालन जरूरी है।

रमा एकादशी 2026: व्रत नियम और पूजा के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें

कार्तिक महीने में आने वाली रमा एकादशी 2026 4 नवंबर को सुबह 11:03 बजे शुरू होकर 5 नवंबर को सुबह 10:35 बजे समाप्त होगी। पंचांग के अनुसार, व्रत 5 नवंबर को रखा जाएगा और इसका पारण 6 नवंबर, शुक्रवार को सुबह 6:37 बजे से 8:48 बजे के बीच किया जा सकता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा विशेष महत्व रखती है।

मुख्य तथ्य

  • रमा एकादशी 4 नवंबर 2026 से 5 नवंबर 2026 तक है।
  • व्रत 5 नवंबर को रखा जाएगा।
  • पारण 6 नवंबर को सुबह 6:37 से 8:48 बजे के बीच किया जा सकता है।
  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
  • चावल खाने और तुलसी के पत्ते तोड़ने से बचें।

रमा एकादशी पर क्या करें?

इस पावन दिन भगवान विष्णु के केशव स्वरूप की पूजा करें। पूजा के दौरान पीले फूल, फल, धूप, दीप और तुलसी के पत्ते अर्पित करने का विधान है। माता लक्ष्मी की भी विधि-विधान से पूजा करें, जिससे घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

तुलसी का विशेष महत्व है, इसलिए तुलसी के पत्ते एकादशी से पहले ही तोड़कर रख लें। इस दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना उचित नहीं माना जाता।

भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें, जैसे 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय'। साथ ही विष्णु सहस्रनाम और उनसे जुड़ी धार्मिक कथाओं का पाठ करना शुभ होता है।

जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, फल और अन्य आवश्यक वस्तुएं दान करें, जिससे पुण्य की प्राप्ति होती है।

रमा एकादशी पर किन बातों का ध्यान रखें?

इस दिन चावल का सेवन वर्जित है क्योंकि इससे व्रत का पुण्य प्रभावित हो सकता है। इसलिए व्रत रखने वाले और सामान्य भोजन करने वाले दोनों को चावल से बचना चाहिए।

मांस, मछली, अंडे, लहसुन और प्याज जैसे तामसिक भोजन का सेवन न करें। सात्विक भोजन करें और मन को शांत रखें।

तुलसी के पत्ते एकादशी के दिन न तोड़ें और तुलसी के प्रति श्रद्धा बनाए रखें।

रमा एकादशी का धार्मिक महत्व

रमा एकादशी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में आती है और इसे अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति, सौभाग्य और समृद्धि आती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत पापों से मुक्ति दिलाता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत का पालन करता है, उसके जीवन में सकारात्मकता आती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है।

स्रोत: tv9hindi.com

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संपादकीय टीम · Bharat Vistaar

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