वॉशिंगटन और तेहरान में 2 नवंबर को अमेरिकी सेना ने ईरान के केशम द्वीप पर ड्रोन हमला किया। ईरान ने भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराने का दावा किया है। यह घटनाक्रम अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले आया है, जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी बहुमत बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है।
मुख्य तथ्य
- 2 नवंबर को केशम द्वीप पर अमेरिकी ड्रोन हमला हुआ।
- ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दो अमेरिकी MQM-170 ड्रोन गिराने का दावा किया।
- केशम द्वीप ईरान का सबसे बड़ा द्वीप है और समुद्री सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
- अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है।
- मिडटर्म चुनाव से पहले सैन्य तनाव और राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं।
केशम द्वीप पर अमेरिकी ड्रोन हमले का विवरण
ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने केशम द्वीप पर पांच धमाकों की आवाजें सुनने की सूचना दी है। अमेरिकी अधिकारियों ने इस हमले की पुष्टि की है, लेकिन हमले के असर और विस्तार को लेकर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, यह हमला हाल के हफ्तों में ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य हमलों की श्रृंखला का हिस्सा है। इन हमलों को छोटे स्तर पर रखा गया ताकि ईरान के खिलाफ व्यापक युद्ध शुरू होने के संकेत न मिले।
ईरान ने दो अमेरिकी ड्रोन गिराने का दावा क्यों किया?
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास दो अमेरिकी ड्रोन MQM-170 मार गिराए। ईरानी पक्ष के अनुसार, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम का इस्तेमाल कर गिराया गया। IRGC का दावा है कि अब उनके कब्जे में ऐसे ड्रोन की संख्या चार हो गई है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारी इस दावे की पुष्टि नहीं करते।
केशम द्वीप की भौगोलिक और सैन्य महत्ता
केशम ईरान का सबसे बड़ा द्वीप है और यह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रवेश द्वार के पास स्थित है। इसका क्षेत्रफल करीब 1,445 वर्ग किलोमीटर है। पहले यह फ्री ट्रेड जोन और पर्यटन स्थल था, लेकिन अब इसे ईरान की सैन्य रणनीति के लिए अहम माना जाता है। इसके नीचे सुरंगों और नमक की गुफाओं का नेटवर्क मौजूद है, जहां तटीय मिसाइल और तेज हमले वाली नौकाओं को रखा गया है। यह द्वीप समुद्री सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर निगरानी रखी जाती है।
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव और ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू चुनाव के बाद ईरान पर एक और हमला कर सकते हैं। इसके अलावा, अमेरिका में ईरान के खिलाफ सैन्य कदम चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकते हैं। मतदान भारतीय समयानुसार शाम 4:30 बजे से शुरू होगा। रिपब्लिकन पार्टी के लिए सीनेट और हाउस में बहुमत बनाए रखना आवश्यक है।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत और तनाव दोनों जारी
अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थों के जरिए अप्रत्यक्ष बातचीत चल रही है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने बताया कि दोनों देश संदेश भेज रहे हैं। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी भी कतर के दौरे पर थे ताकि बातचीत आगे बढ़ाई जा सके। वहीं, फरवरी में शुरू हुए हमलों और जून के समझौते के बाद तनाव फिर बढ़ गया है। 18 जून को दोनों देशों ने नौवहन की स्वतंत्रता को लेकर समझौता किया था, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया।
"दोनों पक्ष संवाद के रास्ते खुले रखे हुए हैं," ईरान के विदेश मंत्रालय प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा।
स्रोत: deshbandhu.co.in





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