अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव, ट्रंप के लिए राजनीतिक चुनौती
अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने हैं, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा हैं। भले ही ट्रंप खुद इस चुनाव में उम्मीदवार नहीं हैं, लेकिन नतीजे उनके अगले दो साल के राजनीतिक भविष्य को प्रभावित करेंगे। 1946 से 2022 के बीच हुए 20 मिडटर्म चुनावों में 18 बार राष्ट्रपति की पार्टी को प्रतिनिधि सभा में नुकसान हुआ है।
महत्वपूर्ण तथ्य
- 1946 से 2022 तक 20 में से 18 बार राष्ट्रपति की पार्टी को हाउस में सीटें गंवानी पड़ीं।
- इस बार हाउस की 435 सीटों और सीनेट की 100 में से 35 सीटों पर मतदान होगा।
- 2010 में बराक ओबामा के कार्यकाल में डेमोक्रेटिक पार्टी को 64 सीटों का सबसे बड़ा नुकसान हुआ था।
- 2018 में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी ने हाउस की 42 सीटें गंवाई थीं।
- डेमोक्रेटिक पार्टी को हाउस में बहुमत के लिए 3 और, सीनेट में 4 अतिरिक्त सीटें चाहिए।
मिडटर्म चुनावों का इतिहास और ट्रंप की चुनौती
अमेरिका में राष्ट्रपति का कार्यकाल चार साल का होता है, लेकिन हर दो साल में मिडटर्म चुनाव होते हैं। इस चुनाव में सत्ता में रहने वाली पार्टी को अक्सर मतदाताओं की नाराजगी झेलनी पड़ती है। इसीलिए इसे 'मिडटर्म पेनल्टी' या 'प्रेसिडेंशियल पेनल्टी' कहा जाता है।
1946 से 2022 के बीच केवल दो बार राष्ट्रपति की पार्टी को हाउस में फायदा हुआ। 1998 में बिल क्लिंटन की डेमोक्रेटिक पार्टी ने 4 सीटें बढ़ाईं, जबकि 2002 में जॉर्ज डब्ल्यू. बुश की रिपब्लिकन पार्टी को 8 सीटों का फायदा मिला। बाकी 18 चुनावों में औसतन 26 सीटें गंवानी पड़ीं।
ओबामा के समय सबसे बड़ा नुकसान, ट्रंप भी झेल चुके हैं हार
इतिहास में सबसे बड़ा नुकसान 2010 में बराक ओबामा के कार्यकाल में हुआ था, जब डेमोक्रेटिक पार्टी ने हाउस की 64 सीटें गंवाईं। 1946 में हैरी ट्रूमैन की पार्टी को 56 और 1994 में बिल क्लिंटन की पार्टी को 54 सीटों का नुकसान हुआ था। डेमोक्रेटिक राष्ट्रपतियों के कार्यकाल में औसतन 29 सीटें गंवानी पड़ीं, जबकि रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों के समय यह संख्या करीब 23 रही।
डोनाल्ड ट्रंप भी इस चुनौती का सामना कर चुके हैं। 2018 के मिडटर्म चुनाव में उनकी रिपब्लिकन पार्टी को हाउस में 42 सीटें गंवानी पड़ीं, हालांकि सीनेट में उनकी स्थिति मजबूत हुई थी।
अगर विपक्ष को बहुमत मिला तो ट्रंप के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी
मिडटर्म चुनाव में विपक्षी पार्टी को हाउस या सीनेट में बहुमत मिलने का मतलब राष्ट्रपति के फैसलों पर नियंत्रण बढ़ना है। हाउस में बहुमत मिलने पर विपक्ष राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। सीनेट में बहुमत मिलने पर संघीय न्यायाधीशों और महत्वपूर्ण पदों की नियुक्तियां रोकना संभव होता है।
इस बार डेमोक्रेटिक पार्टी को हाउस में बहुमत के लिए 3 और सीटें और सीनेट में 4 अतिरिक्त सीटें जीतनी होंगी। यदि सीनेट में 50-50 की स्थिति बनी तो उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस का टाई-ब्रेकिंग वोट रिपब्लिकन पार्टी के पक्ष में जाएगा।
3 नवंबर के चुनाव नतीजे तय करेंगे कि ट्रंप अपनी नीतियां बिना बाधा लागू कर पाएंगे या कांग्रेस में विपक्ष उनकी राह में रोड़ा अटकाएगा।
स्रोत: hindi.asianetnews.com





टिप्पणियाँ
इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।