डोनाल्ड ट्रंप को मध्यावधि चुनावों में बड़ा झटका लगा है, जहां विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी संसद के दोनों सदनों पर कब्जा कर लिया है। यह चुनावी परिणाम टेक्सास, जॉर्जिया और आयोवा जैसे प्रमुख राज्यों में रिपब्लिकन पार्टी की हार के साथ 8 नवंबर को सामने आए।
मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेट का दबदबा
मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी सीनेट और प्रतिनिधि सभा दोनों में बहुमत हासिल कर लिया है। इसके साथ ही कई राज्यों के गवर्नर पदों पर भी डेमोक्रेट ने जीत दर्ज की है। रिपब्लिकन पार्टी को अपने मजबूत गढ़ माने जाने वाले कई राज्यों में करारी हार मिली है। टेक्सास, मेन, साउथ कैरोलिना, नॉर्थ कैरोलिना, कंसास और आयोवा में रिपब्लिकनों को सीनेट की सीट भी गंवानी पड़ी। नतीजों के असर से ट्रंप की नीतियों और वैश्विक बाजारों पर स्थिरता की उम्मीद बढ़ी है।
क्या ट्रंप बन गए हैं 'लेमडक' राष्ट्रपति?
अमेरिकी संविधान के 22वें संशोधन के तहत, ट्रंप 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में भाग नहीं ले सकते। अब जब उनकी पार्टी को कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत नहीं मिला है, तो ट्रंप को अपनी इच्छानुसार कानून या बजट पारित कराने में कठिनाई होगी। इस स्थिति को राजनीतिक भाषा में 'लेमडक' राष्ट्रपति कहा जाता है, जिसका मतलब है कि वे अपनी शेष अवधि में सीमित प्रभावशाली रहेंगे।
ट्रंप की नीतियों पर प्रभाव
डेमोक्रेटिक पार्टी के नियंत्रण वाले प्रतिनिधि सभा के कारण ट्रंप प्रशासन के टैक्स, आव्रजन और घरेलू आर्थिक नीतियों से जुड़े नए विधेयक पास कराना मुश्किल होगा। बजट आवंटन को लेकर व्हाइट हाउस और कांग्रेस के बीच संघर्ष बढ़ सकता है, जिससे सरकारी कामकाज ठप होने की संभावना है। ट्रंप को अब कार्यकारी आदेश और बजटीय वीटो का सहारा लेना पड़ेगा ताकि वे अपनी प्राथमिकताएं लागू कर सकें।
ईरान युद्ध की स्थिति
अमेरिकी संविधान के अनुसार, सैन्य अभियानों के लिए फंड जारी करने का अधिकार संसद के पास है। डेमोक्रेट्स ईरान के खिलाफ लंबे सैन्य अभियानों के लिए फंड रोकने या सीमित करने की कोशिश कर सकते हैं। संसद की रक्षा और विदेश नीति समितियां ट्रंप प्रशासन के फैसलों की कड़ी निगरानी करेंगी, जिससे आक्रामक सैन्य कदम उठाना कठिन होगा। ट्रंप और नेतन्याहू की हार के बाद ईरान युद्ध के थमने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे विश्व अर्थव्यवस्था में स्थिरता आ सकती है।
वैश्विक नीतियों पर असर
अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर ट्रंप द्वारा लगाए गए एकतरफा कड़े टैरिफ को संसद से कानूनी और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। जलवायु समझौतों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अमेरिका के फैसलों में भी संसद संतुलन बनाए रखने का प्रयास करेगी। घरेलू विवादों के चलते ट्रंप अपने कार्यकाल के अंतिम चरण में विदेश नीति और कूटनीतिक वार्ताओं पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
क्या ट्रंप के खिलाफ महाभियोग आ सकता है?
प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स के बहुमत के कारण वे ट्रंप पर संवैधानिक उल्लंघन का आरोप लगाकर महाभियोग प्रस्ताव पास कर सकते हैं। हालांकि, ट्रंप को पद से हटाने के लिए सीनेट में दो-तिहाई बहुमत (67 वोट) जरूरी है, जो डेमोक्रेट्स के पास नहीं है। इसलिए पद से हटाना कठिन होगा, भले ही महाभियोग प्रक्रिया शुरू हो जाए। ट्रंप के खिलाफ पहले भी महाभियोग प्रस्ताव आ चुका है।
स्रोत: hindi.webdunia.com





टिप्पणियाँ
इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।