नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के दौरान सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साफ कहा है कि वे इस बार भी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। अखिलेश ने 2012 का उदाहरण देते हुए बताया कि तब वे लोकसभा सांसद रहते मुख्यमंत्री बने थे और इस बार भी यही तरीका अपनाएंगे।
अखिलेश यादव का चुनाव न लड़ने का फैसला
अखिलेश यादव ने कहा है कि वे विधानसभा चुनाव में सीधे नहीं उतरेंगे बल्कि पूरे प्रदेश में सपा और पीडीए के पक्ष में प्रचार करेंगे। चुनाव में जीत के बाद वे विधान परिषद या उपचुनाव के जरिए सदस्यता लेकर मुख्यमंत्री पद संभालेंगे। उनका यह बयान बताता है कि वे विधायक बनने की बजाय बिना चुनाव लड़े मुख्यमंत्री पद पर बैठना चाहते हैं।
यूपी में मुख्यमंत्री बने बिना विधायक बने नेताओं का इतिहास
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बिना विधानसभा चुनाव लड़े मुख्यमंत्री बनने की परंपरा नई नहीं है। स्वतंत्रता के बाद कई नेता ऐसे रहे हैं जिन्होंने विधायक चुनाव नहीं लड़कर मुख्यमंत्री पद संभाला। त्रिभुवन नारायण सिंह मुख्यमंत्री बने लेकिन उपचुनाव हारने के बाद इस्तीफा देना पड़ा। मायावती दो बार राज्यसभा सांसद रहते मुख्यमंत्री बनीं और बाद में विधान परिषद में चली गईं। राम प्रकाश गुप्ता भी एमएलसी बनकर सदन के सदस्य बने।
राजनाथ सिंह और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बनने के बाद विधानसभा उपचुनाव में उतरे थे। योगी आदित्यनाथ ने 2017 में सांसद रहते शपथ ली थी और बाद में एमएलसी बने। 2022 में योगी सीधे विधानसभा चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बने।
राजनीतिक रणनीति और इसका प्रभाव
अखिलेश यादव का यह फैसला यूपी की राजनीतिक रणनीति में बदलाव का संकेत देता है। वे विधानसभा चुनाव में खड़े होने के बजाय प्रचार पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। इससे पार्टी की छवि और प्रदेश में उनकी पकड़ मजबूत हो सकती है। हालांकि विधान परिषद या उपचुनाव के जरिए सदस्यता लेने की प्रक्रिया पर अब भी नजर रखी जा रही है।
यह रणनीति यूपी की राजनीति में पहले भी कई बार अपनाई जा चुकी है और अब अखिलेश इसे दोहराने जा रहे हैं। इससे यह भी पता चलता है कि मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए विधायक चुनाव में उतरना अनिवार्य नहीं होता।
स्रोत: bhaskarhindi.com





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