अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मिड टर्म चुनावों में हार और मिडिल ईस्ट में जारी तेल सप्लाई के बीच कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। सीएनबीसी से बातचीत में एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा ने बताया कि ये गिरावट कई कारणों से हुई है, जबकि ईरान में तनाव अभी भी बना हुआ है।
तेल की कीमतों में गिरावट के प्रमुख कारण
एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा के अनुसार, तेल बाजार की कीमतें मुख्य रूप से डर और भरोसे की भावना से प्रभावित होती हैं। सबसे पहली वजह है तेल के टैंकरों का सुरक्षित निकल जाना। युद्ध के माहौल में भी जब तेल से लदे टैंकर सुरक्षित अपने गंतव्य की ओर बढ़ते हैं, तो बाजार को राहत मिलती है और कीमतें गिरने लगती हैं।
दूसरी वजह है मिडिल ईस्ट से सप्लाई का चालू रहना। संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह पोर्ट से तेल की निरंतर सप्लाई निवेशकों को संकेत देती है कि तेल की कमी नहीं होने वाली। इससे बाजार की घबराहट कम होती है और दाम नीचे आते हैं।
तीसरी वजह अमेरिका के मिड टर्म चुनावों में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की हार है। डेमोक्रेट्स ने कांग्रेस के दोनों सदनों पर कब्जा जमा लिया है, जिससे बाजार को उम्मीद है कि ट्रंप युद्ध को लंबा नहीं खींच पाएंगे। ट्रंप ने भी कहा है कि फिलहाल ईरान पर कोई बड़ा हमला नहीं होगा, जिससे तेल बाजार में शांति आई है।
निवेशकों की अनिश्चितता और शांति की उम्मीद
मार्केट एक्सपर्ट प्रियंका सचदेवा ने बताया कि ट्रंप के मिले-जुले बयानों ने बाजार में भ्रम पैदा किया है। अमेरिका ईरान पर सैन्य हमले कर रहा है, लेकिन ट्रंप युद्ध को बढ़ाने से बचना चाहते हैं। इस असमंजस में निवेशक कोई स्पष्ट रणनीति नहीं बना पा रहे हैं। अक्टूबर में तेजी से बढ़े दामों की वजह से अब मुनाफावसूली हो रही है, जिससे कीमतों में गिरावट आई है।
इसके अलावा, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच कतर के माध्यम से शांति वार्ता की संभावनाओं पर भी बाजार नजर बनाए हुए है। हालांकि एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि समझौता अभी दूर है, फिर भी शांति की कोशिशों से बाजार को ठंडक मिलती है।
मिडिल ईस्ट से सप्लाई का डेटा और अमेरिकी भंडार
शिप-ट्रैकिंग डेटा Vortexa के अनुसार, अक्टूबर में मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों की सप्लाई 1.71 करोड़ बैरल प्रतिदिन रही, जो सितंबर के 1.89 करोड़ बैरल से कम है। फिर भी यह युद्ध से पहले के स्तर का लगभग 75% है। सैक्सो बैंक के विश्लेषक ओले हेन्सन ने कहा कि सप्लाई में ये सुधार कीमतों को नीचे लाने में मदद कर रहा है।
वहीं, अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार 30 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में 52.7 लाख बैरल घट गया, जबकि विशेषज्ञों को इसकी बढ़ोतरी की उम्मीद थी।
तेल के दाम और बाजार की स्थिति
| तेल का प्रकार | कीमत में गिरावट | नयी कीमत (प्रति बैरल) |
|---|---|---|
| ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) | 1.75 डॉलर (0.7%) | 101.85 डॉलर |
| अमेरिकी क्रूड (WTI) | 1.18 डॉलर (1.2%) | 94.91 डॉलर |
पढ़ने वालों के लिए सवाल और जवाब
- क्या ट्रंप की हार से तेल की कीमतों में स्थिरता आएगी?
डेमोक्रेट्स के सत्ता में आने से ट्रंप के युद्ध को बढ़ाने की संभावना कम होने के कारण बाजार में शांति आई है। - क्या मिडिल ईस्ट से सप्लाई पूरी तरह प्रभावित नहीं हुई?
शिप-ट्रैकिंग डेटा दिखाता है कि सप्लाई युद्ध के बावजूद लगभग 75% स्तर पर बनी हुई है, जो बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है।
मुख्य तथ्य
- डोनाल्ड ट्रंप की मिड टर्म चुनावों में हार से तेल बाजार में शांति आई है।
- मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई लगातार जारी है, खासकर UAE के फुजैराह पोर्ट से।
- अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार घटा है, जबकि बाजार को बढ़ोतरी की उम्मीद थी।
- ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी क्रूड दोनों की कीमतें बुधवार को 1% से अधिक गिर गईं।
स्रोत: hindi.news18.com





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