बिहार में रेलवे कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए भोजपुर जिले के कोइलवर में सोन नदी पर चार लेन का नया रेल पुल बनाया जाएगा। रेलवे बोर्ड ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और इस परियोजना पर 3,500 से 4,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह पुल मौजूदा कोइलवर रेल पुल के समानांतर बनेगा और हावड़ा-पटना-डीडीयू रेल मार्ग की क्षमता बढ़ाएगा।
प्रमुख तथ्य
- कोइलवर में सोन नदी पर नया चार लेन रेल पुल बनेगा।
- रेलवे बोर्ड ने प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
- पुल निर्माण पर 3,500-4,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
- डीडीयू से झाझा तक 400 किमी रेल लाइन का विस्तार हो रहा है।
- परियोजना को छह चरणों में पूरा किया जाएगा।
बिहार में 400 किलोमीटर रेल लाइन की क्षमता बढ़ाने की योजना
डीडीयू यानी पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से झाझा तक लगभग 400 किलोमीटर रेलखंड की क्षमता बढ़ाने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम चल रहा है। इस परियोजना पर करीब 17 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसमें डीडीयू से किऊल तक तीसरी और चौथी लाइन तथा किऊल से झाझा तक तीसरी लाइन बनाना शामिल है। इसे छह चरणों में बांटा गया है ताकि निर्माण कार्य क्रमशः पूरा किया जा सके।
परियोजना के छह मुख्य रेलखंड
- डीडीयू से दानापुर
- दानापुर से फतुहा
- फतुहा से बख्तियारपुर
- बख्तियारपुर से पुनारख
- पुनारख से किऊल
- किऊल से झाझा
पहले चरण में डीडीयू-दानापुर रेलखंड का विस्तार
योजना के पहले चरण में डीडीयू से दानापुर के बीच लगभग 203 किलोमीटर रेलखंड की क्षमता बढ़ाने का काम होगा। इसी खंड के अंतर्गत कोइलवर में सोन नदी पर नया चार लेन रेल पुल बनाया जाएगा। इसके अलावा दानापुर-फतुहा, फतुहा-बख्तियारपुर, बख्तियारपुर-पुनारख और पुनारख-किऊल में भी अतिरिक्त रेल लाइनें बिछाई जाएंगी। रेलवे इन सभी कार्यों को समन्वित तरीके से आगे बढ़ाने की योजना बना रहा है।
निर्माण और स्वीकृति की प्रक्रिया
परियोजना के विभिन्न हिस्सों पर स्वीकृति और निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से हो रहे हैं। किऊल-झाझा के बीच 54 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन के लिए मई 2026 में 962 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है। इस हिस्से में रेल पुलों के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। दानापुर-फतुहा, फतुहा-बख्तियारपुर और बख्तियारपुर-पुनारख पर भी निर्माण और स्वीकृति की प्रक्रियाएं जारी हैं।
परियोजना की आवश्यकता और महत्व
डीडीयू-पटना-किऊल-झाझा रेल मार्ग, हावड़ा-दिल्ली जैसे व्यस्त रेल कॉरिडोर का अहम हिस्सा है। इस रूट पर यात्री और मालगाड़ियों का दबाव अधिक होने के कारण परिचालन प्रभावित होता है और ट्रेनों को कई बार रुकना पड़ता है। अतिरिक्त रेल लाइनें बनने से ट्रेनों को इंतजार कम करना पड़ेगा, जिससे समय पर परिचालन संभव होगा और भविष्य में नई ट्रेनों के संचालन का मार्ग खुलेगा।
बिहार के उद्योग और व्यापार पर प्रभाव
यह परियोजना केवल यात्रियों तक सीमित नहीं है, बल्कि मालगाड़ियों की आवाजाही भी सुगम बनाएगी। इससे उद्योगों को कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार माल के वितरण में मदद मिलेगी। पटना, भोजपुर, बक्सर, आरा, लखीसराय, मुंगेर और जमुई जैसे जिलों को बेहतर रेल सेवा का फायदा मिलेगा। निर्माण कार्यों के दौरान रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
स्रोत: tv9hindi.com





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