बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बगहा में 12 वर्षीय दुर्गा कुमारी के अपहरण और हत्या मामले में जिला एवं अपर सत्र न्यायालय ने ज्ञान्ती देवी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अपहरण के आरोप में उसे सात साल का कारावास और 10 हजार रुपये का जुर्माना भी दिया गया है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर किया दोषी करार
इस मामले की सुनवाई जिला एवं अपर सत्र न्यायालय में हुई, जहां अभियोजन पक्ष ने साक्ष्य और गवाह पेश किए। अदालत ने इन सबको ध्यान में रखते हुए ज्ञान्ती देवी को दोषी ठहराया। हत्या के मामले में उसे आजीवन कारावास और एक लाख रुपये का जुर्माना दिया गया। वहीं, अपहरण के आरोप में सात वर्ष की सजा और 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला गोबरहिया थाना कांड संख्या 16/025 से जुड़ा हुआ है। मृतक बच्ची के पिता शंकर मांझी ने पुलिस को शिकायत दी थी कि उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर ले जाया गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद परिवार ने न्याय की मांग की।
चार नवंबर 2025 को चौकीदार ने परिजनों को बच्ची की मौत की सूचना दी थी, जिससे परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। पुलिस ने मामले की जांच की और सबूत मिलने पर कानूनी कार्रवाई की।
जुर्माना न देने पर मिलेगी अतिरिक्त सजा
अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित जुर्माना नहीं दिया गया तो दोषी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। हालांकि, जेल में पहले से बिताई गई अवधि को कुल सजा में शामिल किया जाएगा। इस फैसले के साथ ही दुर्गा कुमारी के अपहरण और हत्या केस में न्याय की महत्वपूर्ण प्रक्रिया पूरी हुई है।
यह रिपोर्ट बगहा से अमित कुमार द्वारा दी गई है।
स्रोत: indiatv.in





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