डाइजेशन यानि पाचन के दौरान फाइबर की अहमियत को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है। एमएस ऋचा शर्मा, कंसलटेंट डायटेटिक्स, कैलाश दीपक हॉस्पिटल के अनुसार, भारतीयों की सबसे बड़ी गलती है रोजाना पर्याप्त फाइबर का सेवन न करना। भारत में ज्यादातर लोग सफेद चावल, मैदे वाले उत्पाद और पैकेज्ड स्नैक्स ज्यादा खाते हैं, जबकि दाल, सब्जियां, फल और साबुत अनाज कम लेते हैं।
फाइबर के सही स्रोत और गलतफहमियां
लोग अक्सर सोचते हैं कि फाइबर सिर्फ सलाद में होता है, लेकिन ऋचा शर्मा बताती हैं कि दाल, चना, राजमा, ओट्स, मिलेट्स, आटा, नट्स, बीज और फल भी अच्छे फाइबर स्रोत हैं। इसलिए इन्हें अपनी डाइट में शामिल करना जरूरी है।
कुछ लोग कब्ज होने पर अचानक फाइबर की मात्रा बहुत बढ़ा देते हैं, जिससे गैस, ब्लोटिंग और पेट की समस्या हो सकती है। इसलिए फाइबर को धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए और साथ में पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है।
फलों, सब्जियों और अनाज के बारे में जरूरी बातें
फलों और सब्जियों के छिलकों को हटाना भी एक आम गलती है, क्योंकि इनके छिलकों में भी फाइबर होता है। साथ ही, जब लोग साबुत अनाज की जगह रिफाइंड अनाज खाते हैं, तो फाइबर की मात्रा कम हो जाती है।
ऋचा शर्मा सुझाव देती हैं कि अपनी प्लेट में सब्जियां जरूर रखें, रोजाना एक या दो फल खाएं, साबुत अनाज चुनें और दाल या बीन्स को डाइट का हिस्सा बनाएं।
कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए
अगर कब्ज, पेट में सूजन या बाउल हैबिट्स में लगातार बदलाव हो रहा है, तो खुद से इलाज करने की बजाय डॉक्टर से जांच कराना चाहिए। इससे सही निदान और इलाज संभव होगा।
स्रोत: tv9hindi.com





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