नई दिल्ली में उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत समानता से जुड़े यूजीसी के नए नियमों पर केंद्र सरकार ने पुनर्विचार करने की बात कही है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने बताया कि वह यूजीसी के "Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026" की समीक्षा के लिए कमेटी गठित करने पर विचार कर रही है। अदालत ने इस मामले की सुनवाई चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दी है।
मुख्य बिंदु
- केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यूजीसी नियमों की समीक्षा के लिए कमेटी बनाने का प्रस्ताव रखा।
- नए नियम 2026 में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए सख्ती की गई थी, लेकिन उनकी भाषा को लेकर विवाद है।
- सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में नए नियमों पर अंतरिम रोक लगाकर 2012 के पुराने नियम लागू रखने का आदेश दिया था।
- रोहित वेमुला और पायल तड़वी की माताओं की याचिकाओं के कारण यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है।
- अगले चार सप्ताह में सुनवाई फिर शुरू होगी, जहां सरकार अपनी समीक्षा के बारे में बताएगी।
यूजीसी के नए नियमों का विवाद
यूजीसी ने जनवरी 2026 में उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए नए नियम जारी किए थे। इन नियमों का उद्देश्य समान अवसर प्रदान करना था और 2012 के पुराने नियमों को बदलना था। विशेष रूप से नियम 3(1)(c) में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ अनुचित व्यवहार को जाति आधारित भेदभाव माना गया है।
लेकिन इन नियमों की भाषा को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। नियमों को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इनमें सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के अधिकारों की पर्याप्त रक्षा नहीं की गई है और नियम असंतुलित हैं। वहीं समर्थक कहते हैं कि परिसरों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए कड़ा कानून जरूरी है।
अंतरिम रोक और कोर्ट की सुनवाई
जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने नए नियमों पर अंतरिम रोक लगाकर 2012 के नियम लागू रखने का निर्देश दिया था। अदालत ने नए नियमों की भाषा को अस्पष्ट और दुरुपयोग की संभावना वाला माना था। तब से यह रोक जारी है।
केंद्र ने अगस्त में भी सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह नियमों पर पुनर्विचार कर रहा है। गुरुवार को सरकार ने फिर कहा कि वह समीक्षा के लिए कमेटी बनाने पर विचार कर रही है। हालांकि, अभी तक इस कमेटी के गठन की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
याचिकाकर्ताओं की भूमिका और अगली सुनवाई
यह मामला अबेदा सलीम तड़वी बनाम भारत संघ की याचिका के तहत सुना जा रहा है। इसमें रोहित वेमुला और पायल तड़वी की माताओं ने उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव के खिलाफ याचिकाएं दायर की थीं। दोनों छात्रों की आत्महत्या के बाद उनके परिवारों ने भेदभाव के आरोप लगाए थे।
यूजीसी के नए नियम इन्हीं व्यापक चिंताओं को ध्यान में रखते हुए बनाए गए थे, लेकिन कुछ प्रावधानों को लेकर कानूनी विवाद के कारण उनका कार्यान्वयन रुका हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी है। इस दौरान केंद्र अपनी समीक्षा और कमेटी गठन के संबंध में स्थिति स्पष्ट कर सकता है।
इस फैसले से उच्च शिक्षा संस्थानों में सभी वर्गों के छात्रों के हितों की सुरक्षा पर असर पड़ेगा। सरकार का प्रयास है कि ऐसा नियम बने जो सभी विद्यार्थियों के लिए संतुलित और निष्पक्ष हो।
स्रोत: deshbandhu.co.in





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