पोलैंड की राजधानी वारसॉ में 28 जुलाई को संवैधानिक ट्रिब्यूनल के नियंत्रण को लेकर प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क और राष्ट्रपति करोल नावरोत्स्की के बीच गंभीर विवाद उभरा है। प्रधानमंत्री टस्क द्वारा ट्रिब्यूनल के प्रमुख को हटाने के बाद नई नियुक्तियां की गईं, लेकिन राष्ट्रपति ने नए न्यायाधीशों को शपथ ग्रहण कराने से इंकार किया। इसके बावजूद नवनियुक्त न्यायाधीश ट्रिब्यूनल भवन में पहुंच गए, जिससे राजनीतिक गतिरोध और बढ़ गया।
राजधानी में राष्ट्रपति की वापसी और ट्रिब्यूनल पर तनाव
राष्ट्रपति करोल नावरोत्स्की ने अपनी विदेश यात्रा बीच में ही छोड़कर सीधे संवैधानिक ट्रिब्यूनल पहुंचे। वहां उनके सुरक्षाकर्मियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की खबरें भी सामने आईं। राष्ट्रपति ने ट्रिब्यूनल के अंदर जाकर उन न्यायाधीशों को स्पष्ट कहा कि जिन लोगों ने शपथ नहीं ली है, वे न्यायाधीश नहीं हैं।
प्रधानमंत्री टस्क सेंट्रिस्ट-लेफ़्टिस्ट गठबंधन के नेता हैं, जबकि राष्ट्रपति नावरोत्स्की दक्षिणपंथी लॉ एंड जस्टिस पार्टी से संबद्ध हैं। इस विवाद ने ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के निलंबन के बाद तख्तापलट की आशंकाओं को और तेज किया है। यह पूरा घटनाक्रम संवैधानिक ट्रिब्यूनल पर नियंत्रण पाने की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है।
संवैधानिक व्यवस्था के उल्लंघन का आरोप
राष्ट्रपति नावरोत्स्की ने शनिवार को सरकार पर संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि रातों-रात संवैधानिक अंग पर जबरन कब्जा किया गया है। इस स्थिति को सुधारने के लिए राष्ट्रपति ने संसदीय दलों के प्रतिनिधियों के साथ तत्काल परामर्श बैठक बुलाने की मांग की है।
"आज रात पोलैंड गणराज्य की संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन हुआ है और एक संवैधानिक सरकारी अंग पर जबरन कब्जा कर लिया गया है," उन्होंने कहा।
सुरक्षा बलों की भूमिका और मांगें
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार द्वारा तैनात सुरक्षा बलों को ट्रिब्यूनल परिसर से बाहर निकल जाना चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व अध्यक्ष जबिग्न्यू कपिंस्की से भी इस मामले पर चर्चा की, जिन्होंने सत्ता हथियाने वाले लोगों की कार्रवाइयों को कानूनी नहीं माना। राष्ट्रपति ने कानूनी व्यवस्था की बहाली और न्यायालय परिसर में सरकारी सुरक्षा बलों की वापसी को लेकर गंभीर चिंता जताई।
इसके साथ ही उन्होंने संवैधानिक ट्रिब्यूनल के कानूनी रूप से नियुक्त उपाध्यक्ष बार्टलोमी सोचांस्की को संस्थान के अंदर जाने में सहायता भी प्रदान की।
राजनीतिक टकराव और उप-प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया
पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री सिकोरस्की ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति बहुमत से चुने गए न्यायाधीशों को काम करने से रोक रहे थे। उन्हें फैसले सुनाने, कानूनों की व्याख्या करने या बजट पारित करने से रोक दिया गया था। इसलिए न्यायाधिकरण को पुनः सक्रिय करने के लिए कदम उठाना जरूरी था।
सिकोरस्की ने यह भी बताया कि पुलिस की तैनाती की मांग न्यायाधीश अन्ना कोरविन-पियोट्रोव्स्का ने की थी, जिन्हें जजों और प्रशासनिक कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर खतरे का अंदेशा था।
स्रोत: livetimes.news





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