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इजराइल चुनाव 2026 में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 30 से कम सीटें

इजराइल चुनाव 2026 में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 2009 के बाद पहली बार 30 से कम सीटें मिलने का अनुमान है।

इजराइल चुनाव 2026 में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 30 से कम सीटें

इजराइल के चुनाव 2026 में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 30 से कम सीटें मिलने का अनुमान है।

इजराइल चुनाव के शुरुआती नतीजे

27 अक्टूबर 2026 को हुए इजराइल के चुनाव में करीब 90 फीसदी वोटों की गिनती के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी लिकुड को केवल 26 सीटें मिलने की रिपोर्ट आई है। यह आंकड़ा 2009 के बाद से पार्टी को मिली सबसे कम सीटें हैं। हालांकि वोटों की गिनती अभी जारी है, लेकिन सीटों की संख्या 30 के नीचे रहने की संभावना जताई जा रही है।

सरकार बनाने के लिए आवश्यक सीटें और स्थिति

इजराइल की संसद में कुल 120 सीटें होती हैं और सरकार बनाने के लिए किसी गठबंधन को कम से कम 61 सीटें चाहिए। इस चुनाव में नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी और धार्मिक दलों के गठबंधन को लगभग 53 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं, मुख्य विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिलने की संभावना है। अरब पार्टियों को मिलाकर कुल 19 सीटें मिलने की बात सामने आई है। इन आंकड़ों के अनुसार किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल रहा है।

लिकुड पार्टी का पिछले चुनावों से मुकाबला

लिकुड पार्टी का प्रदर्शन इस बार पिछले चुनावों के मुकाबले कमजोर दिख रहा है। 2009 में लिकुड को 27 सीटें मिली थीं, जबकि 2013 में यह संख्या 31 थी। 2015 में 30 सीटें मिलीं, और अप्रैल 2019 में पार्टी ने 35 सीटें हासिल कीं। सितंबर 2019 में सीटें 32 रहीं, 2020 में पार्टी ने 36 सीटें पाईं जो अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन था। 2021 में सीटें घटकर 30 रह गईं, जबकि 2022 में फिर से 32 सीटें मिलीं।

नेतन्याहू के लिए सरकार बनाना कितना चुनौतीपूर्ण?

इस बार लिकुड की सीटों में कमी का सीधा असर नेतन्याहू की सरकार बनाने की संभावनाओं पर पड़ सकता है। 61 सीटों के बहुमत से दूर होना उन्हें दूसरे दलों का समर्थन जुटाने के लिए मजबूर कर सकता है। यदि वह पर्याप्त सहयोग नहीं जुटा पाते हैं तो उन्हें नई राजनीतिक रणनीति बनानी पड़ सकती है। फिर भी, लिकुड का सबसे बड़ी पार्टी बने रहना उनके लिए महत्वपूर्ण है।

नेतन्याहू की लोकप्रियता और चुनावी माहौल

लिकुड की गिरती सीटों को नेतन्याहू की लोकप्रियता में कमी और राजनीतिक चुनौतियों के रूप में देखा जा रहा है। चुनाव में सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, सैन्य सेवा और सरकार के कामकाज जैसे मुद्दे अहम रहे हैं। मतदाताओं की नाराजगी का असर सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रदर्शन पर पड़ा है।

हालांकि, केवल सीटों की संख्या देखकर नेतन्याहू की लोकप्रियता में गिरावट को पूरी तरह तय नहीं किया जा सकता। गठबंधन की राजनीति, अन्य पार्टियों की भूमिका और मतदाताओं की प्राथमिकताएं भी परिणामों पर असर डालती हैं।

अभी क्या बाकी है?

अंतिम नतीजों का इंतजार है ताकि लिकुड की सीटों का पूरा आंकड़ा सामने आए। यह भी देखना होगा कि नेतन्याहू बहुमत के लिए जरूरी समर्थन जुटा पाते हैं या नहीं। फिलहाल, 2009 के बाद पहली बार लिकुड के 30 से कम सीटें पाने वाला अनुमान पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत है।

स्रोत: tv9hindi.com

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