उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2024 को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने घोषणा की है कि वे इस बार किसी भी सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे। इस फैसले के बाद सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व यूपी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने उनके इस निर्णय पर सवाल उठाए हैं।
मुख्य बिंदु
- अखिलेश यादव ने यूपी विधानसभा चुनाव 2024 में चुनाव न लड़ने का ऐलान किया।
- ओपी राजभर ने अखिलेश पर चुनाव से भागने का आरोप लगाया।
- राजभर ने कहा कि यह सरकार "लाल टोपी वालों" की नहीं है।
- अखिलेश यादव के मंदिर न जाने को लेकर भी सुभासपा प्रमुख ने तंज कसा।
- अयोध्या और मथुरा में राम और कृष्ण जन्मभूमि मंदिरों के पास से गुजरने पर भी सवाल उठाए गए।
ओपी राजभर का अखिलेश यादव पर हमला
ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव को निशाना बनाते हुए कहा कि वे चुनाव से क्यों भाग रहे हैं। उन्होंने लिखा कि उन्हें यह नहीं पता था कि अखिलेश यादव इतना "टोना-टोटका" मानते हैं। राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव बिना चुनाव लड़े मुख्यमंत्री बने थे क्योंकि वे रेडीमेड पार्टी के रेडीमेड शहजादे थे। अब जब उन्हें लगा कि चुनाव लड़ेंगे तो हार जाएंगे, इसलिए वे मैदान छोड़कर भाग रहे हैं।
राजभर ने कहा- यह सरकार "लाल टोपी वालों" की नहीं
ओपी राजभर ने कहा कि यह सरकार "लाल टोपी वालों" की नहीं है, जो पहले टोना-टोटका चलाया करते थे। उन्होंने बताया कि नोएडा, आगरा, अयोध्या और मथुरा जैसे इलाकों में टोना-टोटका मानने वाली सरकार को जनता ने 10 साल पहले ही हटा दिया था। उन्होंने कहा कि आज वे सभी टोना-टोटका, भूत-प्रेत और पिशाच झाड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव एक बार मुख्यमंत्री बने लेकिन अब अगली बार उनकी उम्मीद भी नहीं है। राजभर ने सुझाव दिया कि अगर हिम्मत होती तो वे किसी एक सीट से चुनाव लड़ते, लेकिन वे चुनौती से डर गए।
अखिलेश यादव के मंदिर न जाने पर तंज
ओपी राजभर ने वाराणसी में अखिलेश यादव के बाबा विश्वनाथ के मंदिर न जाने पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि अखिलेश के पास चौराहे पर मिठाई खाने का समय था, लेकिन मंदिर में शीश झुकाने का समय नहीं मिला। राजभर ने कहा कि कम से कम वे पास के काल भैरव बाबा के मंदिर में चले जाते, जहां उनके टोना-टोटका का इलाज हो जाता।
अयोध्या और मथुरा में भी सवाल
राजभर ने यह भी कहा कि अखिलेश यादव को बाबा विश्वनाथ के दरबार में शीश नवाने की हिम्मत नहीं है। वे कुछ दिन पहले अयोध्या गए थे, लेकिन राम जन्मभूमि मंदिर के पास से मुंह मोड़कर निकल गए। मथुरा जाते हैं लेकिन श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर की तरफ देखने से भी कतराते हैं। सावन में काशी के यदुवंशी समाज के लोग सबसे पहले बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करते हैं, लेकिन पिछले साल अखिलेश को निमंत्रित करने के बावजूद वे नहीं गए।
स्रोत: tv9hindi.com





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