करवा चौथ 2026 पर भद्रा काल 28 अक्टूबर सुबह 5:31 बजे शुरू होकर 29 अक्टूबर सुबह 4:27 बजे समाप्त होगा। करवा चौथ की शाम की पूजा भद्रा काल समाप्त होने के बाद होगी, इसलिए पूजा पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
मुख्य तथ्य
- भद्रा काल 28 अक्टूबर 2026 को सुबह 5:31 बजे शुरू होगा।
- भद्रा काल 29 अक्टूबर 2026 को सुबह 4:27 बजे समाप्त होगा।
- करवा चौथ की पूजा शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक होगी।
- सरगी खाने का समय भद्रा काल के बाद होगा, इसलिए कोई बाधा नहीं।
- पूजा में भगवान गणेश, माता पार्वती, भगवान शिव और करवा माता की आराधना शामिल है।
करवा चौथ 2026 पर भद्रा काल का समय
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष भद्रा काल 28 अक्टूबर 2026 को सुबह 5 बजकर 31 मिनट पर शुरू होगा और 29 अक्टूबर 2026 को सुबह 4 बजकर 27 मिनट पर समाप्त होगा। भद्रा काल को हिंदू पंचांग में एक विशेष काल माना जाता है, जिसमें कुछ शुभ कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है।
इस बार भद्रा काल करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी, जिससे इसका व्रत और पूजा पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं होगा।
भद्रा काल का करवा चौथ की पूजा पर प्रभाव
करवा चौथ की मुख्य पूजा शाम के समय होती है, जो इस बार शाम 5 बजकर 38 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट के बीच निर्धारित है। चूंकि भद्रा काल 29 अक्टूबर को सुबह 4 बजकर 27 मिनट पर खत्म हो चुका होगा, इसलिए पूजा के समय भद्रा काल का कोई प्रभाव नहीं रहेगा।
पंचांग के अनुसार, महिलाएं इस पूजा मुहूर्त में भगवान गणेश, माता पार्वती, भगवान शिव और करवा माता की विधि-विधान से पूजा कर सकती हैं और अपने पति की लंबी उम्र की कामना कर सकती हैं।
सरगी खाने का समय और भद्रा काल
करवा चौथ पर सरगी का विशेष महत्व होता है, जिसे महिलाएं सूर्योदय से पहले खाती हैं। इस बार भद्रा काल सुबह 4 बजकर 27 मिनट पर समाप्त हो जाएगा, इसलिए सरगी खाने के समय भद्रा काल की वजह से कोई बाधा नहीं होगी।
सरगी में आमतौर पर फल, मिठाई, सूखे मेवे और अन्य पौष्टिक वस्तुएं शामिल होती हैं, जो व्रत को सफल बनाने में मदद करती हैं।
करवा चौथ 2026 की पूजा का शुभ मुहूर्त
इस वर्ष करवा चौथ की पूजा के लिए शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक का समय शुभ माना गया है। महिलाएं स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनती हैं, पूजा स्थल को सजाती हैं और पूजा के दौरान करवा चौथ की कथा सुनती हैं।
पूजा में भगवान गणेश, भगवान शिव, माता पार्वती और करवा माता की आराधना की जाती है। यह पूजा पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए की जाती है।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है।
स्रोत: tv9hindi.com





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