इजराइल में 2026 के चुनावों के बाद नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने अरब दलों पर चुनाव प्रक्रिया में धांधली करने का आरोप लगाया है और मामले की गहन जांच की मांग की है।
मुख्य तथ्य
- लिकुड पार्टी ने अरब दलों पर मतदाता धमकाने, हिंसा और जालसाजी जैसी गड़बड़ियों का आरोप लगाया।
- पार्टी ने पुलिस, शिन बेट और केंद्रीय चुनाव समिति से जांच की मांग की है।
- अरब दलों को चुनाव में मजबूत समर्थन मिला है, लेकिन कोई भी गठबंधन बहुमत से पीछे है।
- राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने सभी पार्टियों से खुली बातचीत करने को कहा है।
- सरकार गठन पर राजनीतिक दलों के बीच संभावित गठबंधन और समझौते पर निगाहें टिकी हैं।
लिकुड पार्टी ने क्या आरोप लगाए?
लिकुड पार्टी का दावा है कि उनके पास चुनाव में मतदाताओं को धमकाने, हिंसा, रिश्वत, एक से अधिक बार मतदान करने और मतदाता जुटाने के लिए कथित अवैध सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से जुड़ी सैकड़ों गवाहियां और साक्ष्य हैं। पार्टी ने इजराइल की पुलिस, आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट और केंद्रीय चुनाव समिति से इन आरोपों की गहन जांच कराने की मांग की है।
हालांकि, ये आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं। टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय चुनाव समिति के एक अधिकारी ने पहले ही चुनाव में धांधली के दावों को खारिज किया था। इस कारण जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही इन आरोपों की सच्चाई सामने आएगी।
अरब दलों की भूमिका और समर्थन
इस चुनाव में अरब दलों को काफी मजबूत समर्थन मिला है। शुरुआती नतीजों के मुताबिक, नेतन्याहू के नेतृत्व वाला गठबंधन और उनके विरोधी यहूदी दलों का गठबंधन, दोनों ही सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों के बहुमत से कम हैं।
जॉइंट लिस्ट गठबंधन के प्रमुख यूसुफ जबरीन ने कहा कि उनकी पार्टी नेतन्याहू सरकार को हटाने के लिए यहूदी और अरब समुदायों के बीच समान और वास्तविक साझेदारी की राजनीति को बढ़ावा देना चाहती है। उन्होंने मौजूदा सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि देश को नस्लवाद और बहिष्कार के बजाय समानता पर आधारित राजनीति की जरूरत है।
सरकार गठन की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी?
इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने सभी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं से सरकार गठन की बातचीत में खुले मन से हिस्सा लेने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि सभी दलों को कोशिश करनी चाहिए कि देश को फिर से चुनाव में न जाना पड़े।
राष्ट्रपति को अगले सप्ताह चुनाव के आधिकारिक नतीजे मिलने की उम्मीद है। इसके बाद वे संसद में प्रतिनिधित्व रखने वाले सभी दलों से परामर्श करेंगे और सरकार गठन की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।
चुनाव नतीजों ने सरकार गठन को चुनौतीपूर्ण बना दिया है क्योंकि कोई भी गठबंधन स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं कर पाया है। ऐसे में अरब दलों का समर्थन और विपक्षी दलों के बीच सहमति इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाएगी।
स्रोत: hindi.webdunia.com





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