अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की आर्थिक विकास दर के अगले आकलन के लिए जनवरी में आने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (WEO) अपडेट का इंतजार करने का संकेत दिया है। यह समीक्षा इस बात पर निर्भर करेगी कि सुपर अल नीनो जैसी मौसमी घटनाओं से जुड़े जोखिम किस प्रकार विकसित होते हैं।
IMF का भारत की GDP ग्रोथ पर दृष्टिकोण
IMF ने वित्त वर्ष 2026-27 और 2027-28 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान इस महीने 7 प्रतिशत तक बढ़ा दिया था। इससे पहले जुलाई में ये अनुमान क्रमशः 6.4 प्रतिशत और 6.7 प्रतिशत थे। यह वृद्धि भारत में मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र में अच्छी गतिविधियों के कारण मानी गई है।
संस्था ने कहा है कि फिलहाल भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर मजबूत बनी हुई है। हालांकि, सुपर अल नीनो से जुड़े जोखिमों को अभी तक विकास दर के अनुमान में नकारात्मक प्रभाव के रूप में शामिल नहीं किया गया है।
सुपर अल नीनो और महंगाई के बढ़ने के खतरे
सुपर अल नीनो उस मौसमी स्थिति को कहते हैं जहां प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक हो जाता है। इससे वैश्विक स्तर पर बारिश, सूखे और तापमान के पैटर्न में बदलाव हो सकता है, जो कृषि उत्पादन और खाद्य कीमतों को प्रभावित कर सकता है।
IMF ने भारत के संदर्भ में दो मुख्य जोखिम बताए हैं:
- फसल उत्पादन में गिरावट: प्रतिकूल मौसमी बदलाव से कृषि उपज प्रभावित हो सकती है।
- खाद्य महंगाई में वृद्धि: खाद्य पदार्थों की आपूर्ति घटने से कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
महंगाई बढ़ने से परिवारों को रोजमर्रा की आवश्यकताओं पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है, जिससे उनकी खरीद क्षमता कम हो सकती है और घरेलू मांग पर नकारात्मक असर पड़ने की संभावना बनी रहती है।
फिर भी, IMF ने इन जोखिमों को फिलहाल संभावित माना है, न कि निश्चित। इसका मतलब यह है कि भारत में फसल उत्पादन में गिरावट या महंगाई के बढ़ने का असर अब तक पक्का नहीं है।
जनवरी में IMF की अगली समीक्षा
IMF ने हाल ही में बैंकॉक में अपनी ताजा वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें भारत की विकास दर का अनुमान 7 प्रतिशत रखा गया है। जनवरी में आने वाले अपडेट में संस्था मौसम संबंधी परिस्थितियों का पुनर्मूल्यांकन करेगी।
यदि सुपर अल नीनो के कारण वास्तविक आर्थिक प्रभाव दिखते हैं, तो भारत की विकास दर के अनुमान में बदलाव संभव है। फिलहाल IMF घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की मजबूती के आधार पर भारत की आर्थिक संभावनाओं को मजबूत मानता है।
मुख्य बिंदु
- IMF ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान वित्त वर्ष 2026-27 और 2027-28 के लिए 7 प्रतिशत रखा है।
- सुपर अल नीनो से फसल उत्पादन में गिरावट और महंगाई बढ़ने के संभावित जोखिम हैं।
- IMF ने अभी इन जोखिमों को संभावित माना है, न कि निश्चित।
- जनवरी में IMF मौसम संबंधी जोखिमों की समीक्षा कर विकास दर के अनुमान में बदलाव कर सकता है।
स्रोत: hindi.webdunia.com





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