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इजरायल में गादी आइजनकोट की 4 शर्तें, नेतन्याहू को हटाने की विपक्षी कोशिशें तेज

इजरायल में गादी आइजनकोट ने नेतन्याहू को हटाने के लिए चार शर्तें रखीं, विपक्षी दल सरकार बनाने को लेकर बातचीत में लगे हैं।

इजरायल में गादी आइजनकोट की 4 शर्तें, नेतन्याहू को हटाने की विपक्षी कोशिशें तेज

तेल अवीव: इजरायल में नई सरकार बनाने की प्रक्रिया में तेजी आई है। विपक्षी नेता गादी आइजनकोट ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए चार प्रमुख शर्तें रखीं हैं। इन शर्तों में हरेदी समुदाय के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य करना, इजरायल की यहूदी और लोकतांत्रिक पहचान को बनाए रखना, गाजा में हमास का शासन खत्म करना शामिल है। आइजनकोट ने कहा है कि इन शर्तों को स्वीकार करने वाले दल उनके गठबंधन में शामिल हो सकते हैं। 27 अक्टूबर के चुनाव में किसी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था।

हरेदी समुदाय की सैन्य सेवा पर जोर

आइजनकोट ने हरेदी समुदाय के लिए सैन्य सेवा को अनिवार्य करने को सबसे अहम मुद्दा बताया है। यह विषय इजरायल में लंबे समय से विवादित रहा है और राजनीतिक मतभेदों का कारण भी। आइजनकोट चाहते हैं कि नई सरकार सभी समुदायों के लिए स्पष्ट सैन्य सेवा नीति बनाए। उनकी शर्तों में देश की यहूदी और लोकतांत्रिक पहचान को बचाए रखना और गाजा में हमास शासन का अंत करना भी शामिल है। वे इन मुद्दों पर सहमति के बिना सरकार गठन की ओर नहीं बढ़ना चाहते।

अरब पार्टियों से गठबंधन की बातचीत

विपक्षी मध्यमार्गी गठबंधन और अरब पार्टियों के बीच सरकार बनाने को लेकर बातचीत जारी है। दोनों समूहों के पास मिलकर 67 सांसदों का समर्थन बताया जा रहा है, जो 61 की बहुमत संख्या से अधिक है। वहीं, नेतन्याहू के नेतृत्व वाली लिकुड पार्टी के गठबंधन के पास 53 सांसद हैं। विपक्ष के लिए चुनौती सभी दलों को एक साझा एजेंडे पर सहमत करना है, खासकर अरब पार्टियों के बीच आइजनकोट की शर्तों को लेकर। इसलिए सरकार गठन की प्रक्रिया अभी कई राजनीतिक और वैचारिक मुद्दों से जुड़ी हुई है।

स्पीकर आमिर ओहाना को हटाने की तैयारी

विपक्षी दल नेतन्याहू को राजनीतिक तौर पर कमजोर करने के लिए आमिर ओहाना को संसद के स्पीकर पद से हटाने की योजना बना रहे हैं। ओहाना लिकुड पार्टी के नेता और नेतन्याहू के करीबी माने जाते हैं। विपक्ष का मानना है कि बहुमत के आधार पर स्पीकर पद पर बदलाव कर वे संसद में अपनी ताकत दिखा सकेंगे और सत्ता पक्ष पर दबाव बना सकेंगे। नई संसद के पहले सत्र में इस मुद्दे पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

प्रधानमंत्री के सीधे चुनाव का प्रस्ताव

सरकार गठन की मुश्किलों को देखते हुए प्रधानमंत्री का सीधे जनता द्वारा चुनाव कराने का विचार भी चर्चा में है। इस व्यवस्था में मतदाता सीधे प्रधानमंत्री चुनेंगे, जो अपनी पसंद का मंत्रिमंडल बनाएगा। उसे सरकार चलाने के लिए संसद में बहुमत जुटाने की जरूरत नहीं होगी। यह प्रणाली अमेरिका की राष्ट्रपति प्रणाली के समान होगी। 2021 में भी नेतन्याहू ने ऐसा प्रस्ताव दिया था। विपक्षी दल फिलहाल इस विकल्प पर विचार कर रहे हैं, लेकिन इसे लागू करने के लिए मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव करना होगा। अरब पार्टियां इस प्रस्ताव पर अभी असमंजस में हैं।

सरकार बनाने के लिए 42 दिन का समय

चुनाव के बाद राष्ट्रपति इसाक हर्जोग सभी दलों के नेताओं से चर्चा करते हैं और सरकार बनाने की जिम्मेदारी किसी नेता को देते हैं। इस नेता को शुरू में 28 दिन मिलते हैं, जिसे राष्ट्रपति 14 दिन तक बढ़ा सकते हैं। कुल मिलाकर सरकार बनाने के लिए 42 दिन का समय होता है। इस अवधि में नेता को समर्थन जुटाना और मंत्रिमंडल पर सहमति बनानी होती है। आइजनकोट नेतन्याहू विरोधी दलों से लगातार मिल रहे हैं ताकि मजबूत सरकार बनाने का दावा पेश कर सकें।

नेतन्याहू के खिलाफ प्रदर्शन

"टाइम्स ऑफ इजरायल" के अनुसार, तेल अवीव, बीरशेबा, हाइफा और तईबा में नेतन्याहू सरकार के विरोध में प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने मध्यमार्गी और अरब पार्टियों से एकजुट होकर सरकार बनाने की अपील की। उनका कहना था कि चुनाव में नेतन्याहू विरोधी मतों को बहुमत मिला है, इसलिए विपक्ष को मिलकर नई सरकार बनानी चाहिए। अब सवाल यह है कि क्या आइजनकोट अपनी शर्तों पर दूसरे दलों को राजी कर पाएंगे और नेतन्याहू को सत्ता से हटाने में सफल होंगे।

स्रोत: deshbandhu.co.in

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