ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेटर उस्मान ख्वाजा ने 2026 की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया। संन्यास के बाद उन्होंने अपनी जिंदगी की एक गंभीर बीमारी का खुलासा किया, जिससे वे चुपचाप जूझते रहे।
गंभीर बीमारी से जूझते रहे ख्वाजा
22 साल की उम्र से लेकर संन्यास तक उस्मान ख्वाजा एक गंभीर बीमारी से पीड़ित थे, जिसका उन्होंने क्रिकेट के दौरान किसी को नहीं बताया। उन्होंने बताया कि यह बीमारी उनकी जिंदगी को भी खतरे में डाल सकती थी। ख्वाजा ने कहा कि उन्हें सच में लगने लगा था कि वे मरने वाले हैं। वह एक प्रोफेशनल क्रिकेटर से ऐसे इंसान बन गए थे जो बाथरूम से कमरे तक 10 मीटर की दूरी तक भी चल नहीं पा रहे थे।
करियर में 88 टेस्ट और 16 शतक
ख्वाजा ने बताया कि घुटने के गंभीर दर्द ने उन्हें ऐसा महसूस कराया कि उनका करियर शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाएगा। बावजूद इसके, दवाइयों और डॉक्टर की सलाह से उन्होंने 88 टेस्ट मैच खेले और 16 शतक लगाए। वह ऑस्ट्रेलिया की तरफ से खेलने वाले पहले पाकिस्तानी मूल के क्रिकेटर थे।
करीबी दोस्त डेविड वार्नर को भी नहीं बताया
इस बीमारी के बारे में ख्वाजा ने केवल डॉक्टर और टीम मैनेजमेंट को बताया, लेकिन किसी अन्य क्रिकेटर को नहीं। अपने करीबी दोस्त डेविड वार्नर को भी उन्होंने इस बारे में कुछ नहीं बताया क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि मैच के दौरान कोई उन्हें हमदर्दी से देखे या विरोधी इसका फायदा उठाएं।
दवाइयों के बिना क्रिकेट संभव नहीं था
ख्वाजा का मानना है कि सही समय पर दवाइयां और इंजेक्शन न मिलते तो वे इतने लंबे समय तक क्रिकेट नहीं खेल पाते और सामान्य जीवन भी नहीं जी पाते। अपनी आत्मकथा ‘सब्र’ में उन्होंने बताया कि इस बीमारी से लड़कर भी क्रिकेट खेलने वाला लड़का यह संदेश देना चाहता है कि कोई भी व्यक्ति अपनी मुश्किल हालात में भी अपने लक्ष्य को पूरा कर सकता है।





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