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इजरायल चुनाव 2026: नेतन्याहू की सातवीं बार पीएम बनने की राह या नया नेतृत्व?

27 अक्टूबर को इजरायल में चुनाव, नेतन्याहू की सातवीं बार पीएम बनने या नए नेतृत्व के लिए वोटिंग हो रही है।

इजरायल चुनाव 2026: नेतन्याहू की सातवीं बार पीएम बनने की राह या नया नेतृत्व?

27 अक्टूबर 2026 को इजरायल में आम चुनाव के लिए मतदान हो रहा है, जिसमें 73 लाख से ज्यादा मतदाता प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व को जारी रखने या नए नेतृत्व के लिए वोट करेंगे। यह चुनाव मिडिल-ईस्ट की भू-राजनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर अहम प्रभाव डाल सकता है।

मतदान की प्रक्रिया और सुरक्षा

इजरायल में मतदान सुबह 7 बजे से रात 10 बजे तक चलता रहेगा। कुल 7,336,553 नागरिक वोट देने के योग्य हैं। चुनाव में 12,018 मतदान केंद्र बनाए गए हैं जिनमें से 6,209 केंद्र ऐसे हैं जहां पहुंच आसान है और 3,621 केंद्र विशेष रूप से सुलभ बनाए गए हैं। यह चुनाव एक नाजुक राजनीतिक माहौल में हो रहा है, जहां इजरायल ईरान के साथ संघर्ष और दक्षिणी सीमा पर हिजबुल्लाह से झड़पों का सामना कर रहा है।

नेतन्याहू और गादी आइसेनकोट के बीच मुकाबला

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के मुख्य प्रतिद्वंद्वी पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइसेनकोट हैं, जिन्होंने ‘यशार’ नामक नई मध्यमार्गी पार्टी बनाई है। ओपिनियन पोल में आइसेनकोट, नेतन्याहू की ‘लिकुड’ पार्टी को कड़ी चुनौती दे रहे हैं। विपक्ष भी नेतन्याहू के खिलाफ एकजुट है। नेतन्याहू खुद को एकमात्र ऐसे नेता के रूप में पेश कर रहे हैं जो ईरानी खतरे से निपट सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप ने भी नेतन्याहू का समर्थन किया है और उनकी प्रशंसा की है।

चुनावी मुद्दे और मतदाताओं की चिंताएं

इजरायल डिफेंस फोर्सेज के पूर्व मेजर एरियल एवरबुच ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा, अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदियों की अनिवार्य सैन्य भर्ती और युद्ध के बाद की अनिश्चितता प्रमुख मुद्दे हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध के बीच कई नागरिक अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। ऑर्थोडॉक्स यहूदियों की सेना में भागीदारी और भविष्य की अनिश्चितता भी मतदाताओं के लिए बड़ी चिंता हैं। एवरबुच ने यह भी कहा कि संभव है कि कोई स्पष्ट विजेता न निकले और सत्ता का फैसला दूसरे दौर में हो।

61 सीटों की बहुमत की चुनौती

इजरायल की संसद ‘नेसेट’ में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी या गठबंधन को कम से कम 61 सीटें चाहिए। इतिहास में कोई भी पार्टी अकेले इतनी सीटें नहीं जीत पाई है, इसलिए गठबंधन सरकारें बनती हैं। हाल के ओपिनियन पोल में आइसेनकोट नेतन्याहू से आगे दिखे, लेकिन कोई भी गठबंधन 61 सीटों का बहुमत हासिल करने की स्थिति में नहीं था। चुनाव के बाद सरकार बनाने का फैसला विभिन्न पार्टियों के बीच गठबंधन के आधार पर होगा।

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संपादकीय टीम · Bharat Vistaar

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