सुप्रीम कोर्ट ने केरल कांग्रेस के आधिकारिक X अकाउंट पर 12 अक्टूबर को वायरल हुई विवादित पोस्ट के मामले में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत पर लगाए गए आरोपों को लेकर नाराजगी जताई है। अदालत ने इस मामले में अवमानना की कार्रवाई न किए जाने के कारण केरल कांग्रेस से सवाल पूछे हैं।
मुख्य बातें
- जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पांचोली की पीठ ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्यायिक फैसलों की आलोचना पर अपना रुख स्पष्ट किया।
- केरल कांग्रेस ने बिना मंजूरी के पोस्ट डालने और बाद में उसे हटाने की बात स्वीकार की है।
- सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार और सिद्धार्थ अग्रवाल को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया।
- अदालत ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से मामले में सहयोग मांगा है।
- इस विवाद के बाद कांग्रेस ने जिम्मेदार व्यक्ति को पद से हटाने की जानकारी दी।
न्यायिक फैसलों की आलोचना पर अदालत का रुख
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पांचोली की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि न्यायिक फैसलों की आलोचना की जा सकती है, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप या डराने-धमकाने के लिए हथियार नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा, "कोई व्यक्ति कितना भी ऊंचे पद पर क्यों न हो, अदालत के अधिकार को कमजोर करने की कोशिशों से सख्ती से निपटना चाहिए।"
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायपालिका के अधिकार को किसी राजनीतिक समर्थन की जरूरत नहीं है और यह कानून के शासन पर आधारित है। न्यायिक संयम को संस्थागत कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।
केरल कांग्रेस की सफाई और माफी
सुनवाई के दौरान केरलम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के वकील ने कहा कि विवादित पोस्ट पदाधिकारियों की मंजूरी के बिना अपलोड की गई थी और बाद में उसे हटा दिया गया। उन्होंने अदालत को बताया कि पार्टी ने बिना शर्त माफी भी मांगी है। इस पर जस्टिस अरविंद कुमार ने कहा कि अदालत यह जांचेगी कि माफी "कलम से आई है या दिल से"।
एमिकस क्यूरी और अन्य सहयोगी नियुक्ति
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार और सिद्धार्थ अग्रवाल को एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) नियुक्त किया है। वे अदालत को यह तय करने में मदद करेंगे कि मामला आपराधिक अवमानना का है या दीवानी अवमानना का। इसके साथ ही अदालत ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से सहयोग भी मांगा है।
विवादित पोस्ट और शिकायत की Timeline
यह विवाद कांग्रेस की केरलम इकाई के आधिकारिक X अकाउंट पर 12 अक्टूबर को प्रकाशित एक पोस्ट से शुरू हुआ था, जो वायरल हो गया था। इसके बाद तीखी आलोचना हुई और पोस्ट हटा दी गई। पार्टी ने कहा कि इसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति को पद से हटा दिया गया है।
मुख्य न्यायाधीश को संबोधित करते हुए अधिवक्ता विनीत जिंदल ने 13 अक्टूबर को शिकायत दर्ज कराई थी, जिसे 30 अक्टूबर को रिट याचिका के रूप में दर्ज किया गया। शिकायत में यह भी जांच की मांग की गई कि क्या राहुल गांधी और अन्य नेताओं द्वारा सुप्रीम कोर्ट परिसर में बिना अनुमति राजनीतिक प्रदर्शन और नारेबाजी की गई थी, जिससे न्यायालय के कर्मचारियों और वकीलों की आवाजाही प्रभावित हुई।
KPCC अध्यक्ष का बयान
इससे पहले केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ ने बयान जारी कर कहा था कि यह पोस्ट पार्टी नेतृत्व की जानकारी या सहमति के बिना प्रकाशित की गई थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस न्यायपालिका की निष्पक्षता को लेकर कोई असहमति नहीं रखती।
स्रोत: hindi.webdunia.com





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