भोपाल में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का असर
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में धनतेरस और दीपावली से ठीक पहले सफाई कर्मचारियों की हड़ताल ने शहर की सफाई व्यवस्था को प्रभावित कर दिया है। राजधानी की सड़कों और कॉलोनियों में जगह-जगह कचरे के ढेर दिख रहे हैं, जिससे आम लोगों को परेशानी हो रही है। करीब ढाई लाख दैनिक वेतनभोगी सफाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं, जिसका असर प्रदेश के 10 संभागों, 16 नगर निगमों और 374 नगरपालिकाओं में देखा जा रहा है।
सफाई कर्मचारियों की प्रमुख मांगें और सरकार से संवाद की जिद
हड़ताल कर रहे सफाई कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से सीधे बातचीत की मांग की है। उन्होंने साफ कर दिया है कि वे सांसद, विधायक या किसी अन्य मध्यस्थ के जरिए बातचीत स्वीकार नहीं करेंगे। कर्मचारी चाहते हैं कि सरकार उनकी मांगों पर सीधे संवाद करे।
सफाई कर्मचारियों की मुख्य मांगों में नियमितीकरण, 25 हजार रुपये मासिक वेतन, ठेका प्रथा को खत्म करना और अनुकंपा नियुक्ति शामिल है। कर्मचारी बताते हैं कि मौजूदा महंगाई के दौर में करीब 9 हजार रुपये वेतन में परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। लंबे समय से उनकी मांगों को अनदेखा किए जाने से वे हड़ताल पर उतर गए हैं।
इसके अलावा कर्मचारियों ने शुक्रवार को अटल भवन में तालाबंदी करने और जलापूर्ति रोकने की चेतावनी भी दी है। इससे आने वाले दिनों में केवल सफाई व्यवस्था ही नहीं, बल्कि पेयजल आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर उठाए सवाल
मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सफाई कर्मचारियों की हड़ताल और उनकी मांगों को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाल्मीकि समाज के लोगों के पैर छूकर आशीर्वाद ले रहे हैं, लेकिन सफाई कर्मचारियों की मांगें नहीं मानी जा रही हैं। सिंघार ने पूछा कि क्या यह केवल दिखावा था।
उन्होंने सरकार से पूछा कि शहरों में फैले कचरे की जिम्मेदारी कौन लेगा, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय या मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान। उन्होंने कहा कि दीपावली जैसे बड़े त्योहार पर भी शहरों में कचरे के ढेर लगे हैं। सरकार बड़े आयोजन करती है, लेकिन सफाई कर्मचारियों की मांगों को सुनने और अधिकार देने का समय नहीं निकाल पा रही है।
साथ ही, सिंघार ने सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि प्रदेश में चैंबर की सफाई के दौरान हुई आठ घटनाओं में कई कर्मचारियों की मौत हुई है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि ऐसी मौतों पर 30 लाख रुपये मुआवजा दिया जाना चाहिए, लेकिन मध्य प्रदेश में केवल 2 से 4 लाख रुपये ही दिए जाते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कर्मचारियों को नियमित करने के नियमों का पालन नहीं हो रहा है।
सिंघार ने साफ कहा कि सरकार कर्मचारियों को नियमित नहीं करना चाहती और न ही 25 हजार रुपये वेतन देने के लिए तैयार है। उन्होंने सरकार से तुरंत नीति बनाने, ठेका प्रथा खत्म करने और अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग की।
दीपावली पर सफाई व्यवस्था में चुनौती
दीपावली के मौके पर सफाई कर्मचारियों की हड़ताल ने नगर निकायों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। बाजार, सड़कें और आवासीय इलाकों में कचरा जमा हो गया है, जिससे नागरिकों की चिंता बढ़ रही है। अब सबकी नजर सरकार और हड़ताल कर रहे कर्मचारियों के बीच बातचीत पर टिक गई है।
यह स्पष्ट नहीं है कि त्योहार के दौरान सफाई व्यवस्था कब तक सामान्य होगी और सरकार कर्मचारियों की मांगों पर क्या फैसला लेगी। फिलहाल सफाई कर्मचारियों ने सीधे संवाद और बेहतर वेतन सहित ठेका प्रथा खत्म करने की मांग पर अड़ा हुआ हैं।
मुख्य बिंदु
- भोपाल सहित मध्य प्रदेश के कई शहरों में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से कचरा जमा हो गया है।
- करीब ढाई लाख दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं।
- कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से सीधे बातचीत की मांग की है और ठेका प्रथा बंद करने की बात कही है।
- नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर सफाई कर्मचारियों की मांगें न सुनने का आरोप लगाया।
- सफाई कर्मचारियों ने जलापूर्ति रोकने और अटल भवन में तालाबंदी की चेतावनी भी दी है।
सरकार की ओर से अभी इस मामले में कोई अंतिम बयान सामने नहीं आया है।
स्रोत: hindi.webdunia.com





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