31 अक्टूबर को जॉर्जिया के अटलांटा में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर महत्वपूर्ण बैठक की।
मुख्य बातें
- क्वाड देशों ने सुपर इंटेलिजेंस और AI के लिए 8.5 करोड़ डॉलर से अधिक की वित्तीय सहायता देने पर सहमति जताई।
- समुद्री सुरक्षा, सप्लाई चेन और साइबर ठगी को रोकने के लिए रणनीतिक कदम उठाने पर चर्चा हुई।
- नेपाल में आपदा राहत में भारत की भूमिका की प्रशंसा की गई।
- 2027 में समुद्री निगरानी और सुरक्षा अभ्यास आयोजित किए जाएंगे।
- डिजिटल कनेक्टिविटी और 5G-6G तकनीक के विकास पर भी जोर दिया गया।
तकनीकी और आर्थिक सहयोग
क्वाड देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुपर इंटेलिजेंस (SI) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विकास के लिए 85 मिलियन डॉलर से अधिक की वित्तीय मदद देने का निर्णय लिया। इस पहल का उद्देश्य इन तकनीकों के अनुसंधान और पहुंच को बढ़ाना है।
साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक कचरे से महत्वपूर्ण खनिजों की रिकवरी और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका भारत और ASEAN देशों में 1 करोड़ डॉलर सहायता देगा। सप्लाई चेन को मजबूत करने और ऊर्जा सुरक्षा के लिए सितंबर में क्वाड फ्यूल सिक्योरिटी फोरम का आयोजन भी तय किया गया है।
फिजी के बंदरगाहों सुवा, लाउटोका और रोकोबिली के आधुनिकीकरण में सहयोग दिया जाएगा। क्वाड ने अब तक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में 2,000 से अधिक इंफ्रास्ट्रक्चर फेलोशिप प्रदान की हैं। पहली बार क्वाड बिजनेस लीडर्स फोरम भी आयोजित किया जाएगा, जबकि 18 नवंबर को टोक्यो में एक्सपोर्ट क्रेडिट एजेंसियों की बैठक होगी।
समुद्री सुरक्षा और निगरानी
समुद्री सुरक्षा पर क्वाड-अट-सी मिशन के तहत दूसरा शिप ऑब्जर्वर मिशन 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक चेन्नई से पर्थ के बीच सम्पन्न हुआ। इसमें चारों देशों के प्रतिनिधि भारतीय तटरक्षक बल के जहाज पर मौजूद थे।
2027 में Sea Dragon अभ्यास के तहत पहली संयुक्त समुद्री निगरानी गतिविधि आयोजित करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। इसके अलावा, 2027 की शुरुआत में पहला क्वाड Maritime Domain Awareness (MDA) Track 1.5 Symposium भी होगा।
साइबर सुरक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी
बैठक में 5G और 6G जैसी सुरक्षित और विश्वसनीय संचार तकनीकों के विकास पर जोर दिया गया। क्वाड देशों ने एडवांस चिप्स और AI हार्डवेयर की सप्लाई चेन में संभावित बाधाओं की पहचान के लिए नई पहल की सहमति दी।
डिजिटल पहचान मानक (Digital Identity Standard) को लेकर सहयोग बढ़ाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने का संकल्प लिया गया है।
आपदा प्रबंधन और अगली तैयारियां
नेपाल में अगस्त में आई बाढ़ में जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना जताई गई। भारत की आपदा राहत और बचाव अभियान में अग्रणी भूमिका की प्रशंसा की गई।
नवंबर में भारत के AJHE-26 अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के पर्यवेक्षक शामिल होंगे। हिंद-प्रशांत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क (IPLN) के तहत आपदा राहत की व्यवस्था मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।
क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन और विदेश मंत्रियों की अगली बैठक की तैयारियों पर भी जोर दिया गया है।
"हम हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक स्वतंत्र, खुले और सुरक्षित माहौल बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
यह बैठक क्वाड देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। तकनीक, समुद्री सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर हुई यह चर्चा क्षेत्रीय स्थिरता और विकास के लिए अहम मानी जा रही है।
स्रोत: tv9hindi.com





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