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इजराइल चुनाव में वोट चोरी के आरोप और गिरफ्तारी के बाद जारी विवाद

इजराइल चुनाव में वोट चोरी के आरोपों और गिरफ्तारी के बाद चुनाव आयोग ने विदेशी दखल की बात कही है।

इजराइल चुनाव में वोट चोरी के आरोप और गिरफ्तारी के बाद जारी विवाद

इजराइल में 27 नवंबर को हुए चुनाव में वोट चोरी के आरोपों और गिरफ्तारी के बाद जारी विवाद को लेकर चुनाव आयोग ने बयान जारी किया है।

चुनाव आयोग का बयान और विदेशी दखल का असर

इजराइल के चुनाव आयोग के प्रमुख नोआम सोलबर्ग ने रविवार को कहा कि यदि चुनाव में विदेशी दखल के आरोप सही भी साबित होते हैं, तो भी चुनाव के नतीजों में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने यह बात एक वीडियो में कही, जिसमें इजराइल की इंटरनल सिक्योरिटी एजेंसी शिन बेट के प्रमुख और अटॉर्नी जनरल भी मौजूद थे। सोलबर्ग ने यह स्पष्ट किया कि इन आरोपों से चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर कोई सवाल नहीं उठेगा।

वोट चोरी और खरीदने के आरोपों पर गिरफ्तारी

इजराइल पुलिस ने चुनाव से पहले मंगलवार को तीन राजनीतिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था, जिनमें से दो को रविवार को रिहा कर दिया गया। पुलिस के अनुसार, ये लोग कैश से भरे लिफाफे लेकर वोट खरीदने की कोशिश कर रहे थे। रिहा किए गए व्यक्तियों में से एक को शर्तों के साथ छोड़ा गया है, जबकि दूसरे को घर में रहने का आदेश दिया गया है।

पुलिस ने बताया कि ये लोग अरब नेतृत्व वाली पार्टी राअम (Raam) से जुड़े थे, जिसने चुनाव में आठ सीटें हासिल की हैं। पार्टी प्रमुख मंसूर अब्बास ने इन गिरफ्तारीयों की निंदा करते हुए इसे "अलोकतांत्रिक" बताया और कहा कि यह चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश है।

नेतन्याहू पार्टी के आरोप और कतर की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी लिकुड ने आरोप लगाया था कि अरब पार्टियों ने वोट चोरी की है और वोट खरीदने के लिए कतर से पैसा लिया। हालांकि, लिकुड ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिए। कतर ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे झूठी जानकारी फैलाने की कोशिश बताया।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और संभावित गठबंधन

विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट ने नेतन्याहू पर चुनाव के नतीजों को बदनाम करने के लिए संगठित अभियान चलाने का आरोप लगाया। आइजेनकोट पहले अरब पार्टियों के साथ गठबंधन से इंकार कर चुके हैं, लेकिन इस बार किसी भी गठबंधन को बहुमत नहीं मिला है।

27 नवंबर के चुनाव में नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिलीं, जबकि आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के पास 48 सीटें हैं। इजराइल की संसद में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 61 सीटों की आवश्यकता होती है। तीन अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने मिलकर 19 सीटें जीती हैं। अगर ये पार्टियां आइजेनकोट के साथ आती हैं, तो उनके गठबंधन के पास 67 सीटें हो सकती हैं। हालांकि, अरब पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाने का विचार कई लोगों को मंजूर नहीं है।

चुनाव परिणाम की आधिकारिक पुष्टि और आगे की प्रक्रिया

चुनाव के नतीजों को 4 नवंबर को आधिकारिक रूप से प्रमाणित किया जाना है। इसके बाद राष्ट्रपति इसाक हर्जोग किसी एक उम्मीदवार को नई सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे। नई सरकार बनाने के लिए 11 नवंबर तक का समय निर्धारित है।

स्रोत: tv9hindi.com

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संपादकीय टीम · Bharat Vistaar

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