8 नवंबर को पूरे भारत में दिवाली का पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस दिन हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष स्थान है। शाम के शुभ मुहूर्त में भक्त घरों को दीपों और रंगीन रोशनी से सजाते हैं तथा विधि-विधान से लक्ष्मी-गणेश की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी धन, वैभव और सुख-समृद्धि की देवी हैं, जबकि भगवान गणेश विघ्नहर्ता और शुभता के प्रतीक हैं।
भगवान गणेश की पूजा और आरती
दिवाली के अवसर पर पूजा की शुरुआत भगवान गणेश से होती है क्योंकि उन्हें प्रथम पूज्य माना जाता है। गणेश जी की आरती करने से भक्त उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं और जीवन की बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।
आरती के शब्द हैं:
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
(जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा…)
इस आरती में भगवान गणेश को दीनों का सहारा, बाधाओं को दूर करने वाला बताया गया है। भक्त उनकी सेवा से जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
मां लक्ष्मी की आरती और उनके गुण
भगवान गणेश की आरती के बाद मां लक्ष्मी की आरती की जाती है। मां लक्ष्मी को धन, ऐश्वर्य और सौभाग्य की देवी माना जाता है। दिवाली की रात उनकी आरती से परिवार में खुशहाली और समृद्धि बनी रहती है।
मां लक्ष्मी की आरती के शब्द इस प्रकार हैं:
ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
आरती में मां लक्ष्मी को सुख-सम्पत्ति दाता, शुभता प्रदान करने वाली और सब सद्गुणों की जननी बताया गया है। यह भी कहा गया है कि जिन घरों में मां लक्ष्मी रहती हैं, वहां सब कुछ संभव हो जाता है और मन में भय नहीं रहता।
दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की आरती का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आरती पूजा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। दीपक की लौ से देवी-देवताओं की आरती करने का अर्थ है अपनी श्रद्धा और भक्ति प्रकट करना। दिवाली पर भगवान गणेश की आरती करने से विघ्न-बाधाओं से मुक्ति मिलती है, जबकि मां लक्ष्मी की आरती से धन-धान्य, सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की जाती है।
पूरे परिवार के साथ मिलकर आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और त्योहार की खुशियां बढ़ जाती हैं। इसलिए दिवाली की पूजा के अंत में लक्ष्मी-गणेश की आरती अवश्य करनी चाहिए।
महत्वपूर्ण तथ्य
- 8 नवंबर को देशभर में दिवाली धूमधाम से मनाई गई।
- पूजा की शुरुआत भगवान गणेश से होती है।
- लक्ष्मी जी की आरती से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।
- आरती पूजा का अनिवार्य हिस्सा है और बिना इसके पूजा अधूरी मानी जाती है।
स्रोत: tv9hindi.com





टिप्पणियाँ
इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।