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अधीर रंजन ने शुभेंदु सरकार के 1000 करोड़ मंदिर विकास फंड पर उठाए सवाल

अधीर रंजन चौधरी ने शुभेंदु अधिकारी की 1000 करोड़ रुपये की मंदिर विकास योजना पर सवाल उठाए, कहा अन्य धर्मों के लिए भी होना चाहिए फंड।

अधीर रंजन ने शुभेंदु सरकार के 1000 करोड़ मंदिर विकास फंड पर उठाए सवाल

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए 1,000 करोड़ रुपये के तीर्थक्षेत्र सर्किट योजना की घोषणा पर कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने सवाल उठाए हैं।

क्या केवल मंदिरों के लिए फंड क्यों?

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने रविवार को कहा कि मुख्यमंत्री ने सिर्फ मंदिरों के लिए ही 1,000 करोड़ रुपये के इस ऐलान को क्यों प्राथमिकता दी है। उन्होंने यह भी पूछा कि राज्य में चर्च, गुरुद्वारे और मस्जिदें भी हैं, तो केवल मंदिरों के लिए पैसा क्यों दिया जा रहा है?

अधीर रंजन ने कहा कि सरकार जो राजस्व जुटाती है, उसमें प्रदेश के सभी धर्मों के लोग टैक्स चुकाते हैं। इसलिए सार्वजनिक धन का उपयोग सभी समुदायों के लिए समान रूप से होना चाहिए।

शुभेंदु सरकार पर अधीर रंजन का तंज

समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में अधीर रंजन चौधरी ने कहा, "सरकार चलाने का मतलब यह नहीं कि आम लोगों के दिए हुए पैसे का उपयोग सरकार मनमाने तरीके से करे। अगर ऐसा करना है तो सभी मजहबों के लिए होना चाहिए। हमारे देश में केवल एक मजहब का वर्चस्व नहीं है।"

उन्होंने यह भी कहा कि आज काली पूजा और दिवाली का दिन है, ऐसी अवसरों पर मजहब के नाम पर दीवारें बनाकर नफरत फैलाना सही नहीं है। बंगाल में सिर्फ मंदिर ही क्यों? यहां सैकड़ों मस्जिदें, चर्च और गुरुद्वारे भी हैं। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि यह सरकार केवल हिंदुओं की सरकार है, जो अनुचित है।

अधीर रंजन ने जोर देकर कहा कि सरकार को सभी समुदायों को साथ लेकर चलना चाहिए और समान रूप से सभी के हितों का ध्यान रखना चाहिए।

कौन-कौन से धर्म शामिल हैं?

पश्चिम बंगाल में हिन्दू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदायों के लोग रहते हैं। इन सभी समुदायों के धार्मिक स्थल हैं जैसे मंदिर, मस्जिदें, गुरुद्वारे और चर्च। ऐसी स्थिति में केवल मंदिरों के लिए बड़े पैमाने पर धन आवंटित करना विवादास्पद माना जा रहा है।

यह घोषणा शुभेंदु अधिकारी की सरकार की ओर से राज्य के प्राचीन मंदिरों के संरक्षण और विकास के लिए की गई थी। हालांकि कांग्रेस का दावा है कि यह नीति धार्मिक समरसता के सिद्धांतों के विपरीत है।

इस विषय पर अब तक सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह देखना होगा कि सरकार इस आलोचना का क्या जवाब देती है और आगे क्या कदम उठाती है।

Created On : 8 Nov 2026 6:05 PM IST

स्रोत: bhaskarhindi.com

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