इजराइल में हुए आम चुनाव के एग्जिट पोल में विपक्षी गठबंधन को सत्ताधारी गठबंधन से अधिक सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है, जिससे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए सरकार बनाने की राह कठिन हो सकती है। तीन प्रमुख मीडिया संस्थानों के एग्जिट पोल के अनुसार, नेतन्याहू के गठबंधन को 50 सीटें मिलने की उम्मीद है, जो बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों से कम हैं।
नेतन्याहू और विपक्षी गठबंधन की स्थिति
चैनल 13, चैनल 12 और सार्वजनिक ब्रॉडकास्टर कान (Kan) के एग्जिट पोल में पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 52-53 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं, अरब पार्टियों को 17-18 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। i24NEWS के एक अलग एग्जिट पोल में नेतन्याहू के गठबंधन को 55 सीटें और आइसेनकोट के गठबंधन को 49 सीटें मिलने का अनुमान है।
मतदान प्रतिशत और पार्टियों का प्रदर्शन
केंद्रीय चुनाव समिति के अनुसार, इस बार 77.7 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाले, जो 2022 की तुलना में 7.1 प्रतिशत अधिक और 1999 के बाद सबसे अधिक है। लिकुड पार्टी एग्जिट पोल के अनुसार सबसे बड़ी पार्टी बनी रहेगी। चैनल 13 के अनुसार लिकुड को 25, आइसेनकोट की यशार पार्टी को 23 सीटें मिल सकती हैं। इसी तरह चैनल 12 ने लिकुड को 24 और यशार को 22 सीटें दी हैं, जबकि कान के अनुसार लिकुड को 25 और यशार को 21 सीटें मिलने का अनुमान है।
अरब पार्टियों का बढ़ता प्रभाव
एग्जिट पोल में अरब-नेतृत्व वाली पार्टियों के अच्छा प्रदर्शन करने की संभावना है। चैनल 13 और कान के मुताबिक, ये पार्टियां 17 सीटें जीत सकती हैं जबकि चैनल 12 ने 18 सीटों का अनुमान लगाया है। तीनों पोल में इस्लामी राआम पार्टी को 7 सीटें मिलने की उम्मीद जताई गई है। चुनाव के बाद गठबंधन बनाने के दौरान इन पार्टियों का समर्थन या उनकी भूमिका महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
सरकार बनाने की चुनौतियां
तीनों एग्जिट पोल से पता चलता है कि किसी भी पक्ष के लिए स्पष्ट बहुमत मिलना मुश्किल है, जिसके कारण सरकार बनाने के लिए गठबंधन वार्ता लंबी चल सकती है। नेतन्याहू और आइसेनकोट के बीच राष्ट्रीय एकता सरकार बनने की संभावना कम बताई जा रही है क्योंकि दोनों नेताओं के बीच मतभेद हैं। आइसेनकोट ने कहा है कि वह नेतन्याहू के साथ गठबंधन नहीं करेंगे।
नेतन्याहू और विपक्ष की प्रतिक्रियाएं
आइसेनकोट ने मतदान के बाद X (ट्विटर) पर कहा कि जनता ने अपना फैसला सुना दिया है और उन्होंने नेतन्याहू सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी सहयोगियों के साथ मिलकर सरकार बनाने की कोशिश करेगी। दूसरी ओर, नेतन्याहू के सहयोगी गिदोन साअर ने विपक्ष की बढ़त को जल्दी जीत मानने से बचने की चेतावनी दी और कहा कि लिकुड अभी भी इजराइल की सबसे बड़ी पार्टी है।
आधिकारिक नतीजे और आगे की प्रक्रिया
वोटों की गिनती शुरू हो चुकी है और अंतिम परिणाम 30 अक्टूबर तक आने की उम्मीद है। केंद्रीय चुनाव समिति 4 नवंबर को आधिकारिक नतीजे जारी करेगी। इजराइल की आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत, सबसे बड़ी पार्टी बनने का मतलब सरकार बनाना जरूरी नहीं है। राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग राजनीतिक दलों से सलाह लेने के बाद सरकार बनाने के लिए एक सांसद को नामित करेंगे। नामित सांसद के पास 42 दिन होंगे बहुमत का गठबंधन बनाने के लिए।
चुनाव परिणाम क्यों महत्वपूर्ण हैं
इन चुनावों के नतीजे इजराइल की राजनीतिक स्थिरता और सरकार के गठन पर असर डालेंगे। बहुमत न मिलने से नई सरकार बनाने में देरी हो सकती है, जिससे देश में अस्थिरता बढ़ सकती है। विपक्षी गठबंधन की बढ़त और अरब पार्टियों का प्रभाव राजनीतिक समीकरण बदल सकता है। नेतन्याहू के लिए यह चुनाव सत्ता में बने रहने की चुनौती है।
स्रोत: tv9hindi.com





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