शनिवार को हनुमान जी की पूजा करने से शनिदेव की प्रतिकूल दशा दूर होती है, ऐसा पौराणिक कथा में बताया गया है।
शनिवार और हनुमान जी की पूजा का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में सप्ताह के सातों दिन अपने-अपने देवताओं को समर्पित होते हैं। शनिवार का दिन खासतौर पर शनिदेव को समर्पित माना गया है। इस दिन भक्त व्रत, दान और दीपदान जैसे धार्मिक कर्म करके शनिदेव की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। साथ ही, यह भी माना जाता है कि शनिवार को हनुमान जी की पूजा करने से शनिदेव के प्रतिकूल प्रभावों से मुक्ति मिलती है। खासकर उन लोगों के लिए यह महत्वपूर्ण होता है जिनकी कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा चल रही होती है।
हनुमान जी और शनिदेव की पौराणिक कथा
कथाओं के अनुसार, लंकापति रावण ने अपनी शक्ति के प्रदर्शन के लिए ग्रहों को बंदी बना लिया था। इसमें शनिदेव भी शामिल थे जिन्हें रावण ने लंका में कैद कर रखा था ताकि वे उसके और उसके परिवार के खिलाफ कोई प्रभाव न डाल सकें।
हनुमान जी जब माता सीता की खोज में लंका पहुंचे, तो उन्होंने अशोक वाटिका में माता सीता से भेंट की। रावण ने हनुमान जी को बंदी बनाकर उनकी पूंछ में आग लगाई, लेकिन हनुमान जी ने अपनी शक्ति से पूरी लंका में आग फैला दी। इसी दौरान हनुमान जी ने शनिदेव को कैद से मुक्त किया, जिससे उनकी पीड़ा समाप्त हुई।
शनिदेव ने हनुमान जी को दिया वरदान
कैद से मुक्त होने पर शनिदेव ने हनुमान जी का आभार व्यक्त किया और वरदान दिया। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ हनुमान जी की पूजा करेगा, उसे शनि के कष्टों से राहत मिलेगी। यही कारण है कि शनिवार को हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
शनिवार को हनुमान जी की पूजा कैसे करें?
शनिवार के दिन स्नान के बाद घर के मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाना शुभ होता है। हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके बाद लाल फूल, गुड़ और चने का भोग लगाना चाहिए। पूजा के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ करना लाभदायक होता है। सुंदरकांड का पाठ भी शुभ माना जाता है। संभव हो तो शनिवार को हनुमान मंदिर जाकर श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करनी चाहिए।
ध्यान देने की बात है कि यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है।
स्रोत: tv9hindi.com





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