ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम उन 19 देशों से माफी मांगने की तैयारी कर रहे हैं, जिन्हें ब्रिटेन ने कभी गुलाम बनाया था। यह कदम कॉमनवेल्थ मीटिंग से पहले उठाया जा रहा है, जबकि इन देशों की तरफ से मुआवजे का दबाव बढ़ रहा है।
ब्रिटेन की माफी मांगने की योजना और देश
15वीं से 19वीं शताब्दी के दौरान ट्रांस-अटलांटिक दास व्यापार में करीब 1.25 करोड़ अफ्रीकी लोगों को गुलाम बनाकर अटलांटिक पार भेजा गया था। ब्रिटेन ने इन गुलामों को विशेष रूप से गिनी, डीआर कांगो, नाइजीरिया, घाना, लाइबेरिया, बेनिन, टोगो, कैमरून, अंगोला, सिएरा लियोन, गांबिया और सेनेगल जैसे देशों से लिया था।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक, बर्नहैम ने इन देशों से संपर्क किया है और माफी मांगने के औपचारिक तरीके जानने की कोशिश कर रहे हैं ताकि विवाद समाप्त हो सके।
मुआवजे को लेकर ब्रिटेन की स्थिति
पीएम कार्यालय ने साफ किया है कि बर्नहैम मुआवजा देने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन विकास कार्यों के लिए यदि कोई देश मदद मांगता है, तो उसे वित्तीय सहायता देने पर विचार किया जा सकता है।
ब्रिटेन ने माफी क्यों मानी है जरूरी?
जमैका ने ब्रिटेन में सरकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है, जिसकी अनुमति किंग चार्ल्स ने भी दी है। अगर ब्रिटिश अदालत मुआवजा देने का आदेश देती है, तो यह ब्रिटेन सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी।
नवंबर में होने वाली कॉमनवेल्थ समिट में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की भागीदारी महत्वपूर्ण है। ब्रिटेन इस समय कॉमनवेल्थ देशों का समर्थन चाहता है क्योंकि अमेरिका ने यूरोप को अलग-थलग कर दिया है।
कैरेबियाई देशों ने 2,429 लाख करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है, जो ब्रिटेन के लिए इस समय संभव नहीं है। इसके अलावा, बर्नहैम ने कहा है कि 100 साल पुरानी गलती के लिए नई पीढ़ी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
माफी मांगने का इतिहास और अब तक की पहल
2016 में पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने गुलामी के लिए खेद जताया था, लेकिन माफी नहीं मांगी गई थी। अब बर्नहैम की सरकार इसे औपचारिक रूप देने की कोशिश कर रही है ताकि मामलों को सुलझाया जा सके।
महत्वपूर्ण तथ्य
- 15वीं-19वीं सदी में ब्रिटेन ने 1.25 करोड़ अफ्रीकी लोगों को गुलाम बनाया।
- ब्रिटेन 19 देशों से औपचारिक माफी मांगने की योजना बना रहा है।
- मुआवजे को लेकर ब्रिटेन ने साफ किया है कि वह भुगतान के पक्ष में नहीं है।
- जमैका ने ब्रिटेन में मुकदमा दायर किया है, जिसके कारण ब्रिटेन दबाव में है।
- नवंबर में कॉमनवेल्थ समिट ब्रिटेन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्रोत: tv9hindi.com





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