बालोद जिले के नारागांव गांव में महिलाओं के सामूहिक प्रयास से बिना सरकारी धन खर्च किए पूरे गांव को सौर ऊर्जा से जोड़ा गया है। गुरुर ब्लॉक के इस गांव में अब 150 से ज्यादा घरों की छतों पर सोलर रूफटॉप सिस्टम लग चुके हैं, जिससे यह प्रदेश का पहला सौर ऊर्जीकृत गांव बन गया है।
मुख्य तथ्य
- नारागांव में 150 से अधिक घरों पर सोलर रूफटॉप लागू किए गए।
- इस पहल में न तो ग्रामीणों पर आर्थिक बोझ डाला गया और न ही सरकार को अतिरिक्त बजट देना पड़ा।
- किसी कंपनी के CSR फंड का उपयोग नहीं किया गया।
- आंचल महिला संकुल संगठन की महिलाओं ने सोलर दीदियों के रूप में अभियान चलाया।
- महिलाओं को इस काम से 2.50 लाख रुपए से अधिक की आय हुई है।
सोलर दीदियों की भूमिका
नारागांव में सौर ऊर्जा के विस्तार में आंचल महिला संकुल संगठन की महिलाओं ने अहम भूमिका निभाई। ये महिलाएं ‘‘सोलर दीदियां’’ के रूप में गांव-गांव गईं और ग्रामीणों को सोलर ऊर्जा के फायदे समझाए। उन्होंने लोगों को पारंपरिक बिजली स्रोतों पर निर्भरता कम करने के लिए सोलर रूफटॉप सिस्टम लगवाने के लिए प्रेरित किया।
शुरुआत में ग्रामीणों को इस नई व्यवस्था के लिए तैयार करना चुनौती था, लेकिन महिलाओं की लगातार बातचीत और जागरूकता से यह बाधा दूर हुई। धीरे-धीरे 150 से अधिक घरों में सोलर सिस्टम लग गए।
आर्थिक मॉडल और स्वावलंबन
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील चंद्रवंशी ने बताया कि इस पूरी पहल में न तो ग्रामीणों को कोई अतिरिक्त आर्थिक भार उठाना पड़ा और न ही सरकार पर कोई नया वित्तीय दबाव आया। न तो किसी सरकारी अनुदान और न ही CSR फंड का सहारा लिया गया।
महिलाओं के नेतृत्व में सामुदायिक सहभागिता और स्व-प्रबंधन के जरिए यह सफल मॉडल तैयार हुआ है। इससे गांव के लोग न केवल स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग कर रहे हैं बल्कि महिलाओं के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।
महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण
सौर ऊर्जा के इस अभियान से महिलाओं को आर्थिक लाभ भी मिला है। सोलर दीदियों ने इस काम को आजीविका का जरिया बनाया है। अब तक महिला समूह की आय 2.50 लाख रुपए से अधिक हो चुकी है। इससे महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं और समाज में नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।
नारागांव मॉडल का व्यापक प्रभाव
यह पहल दूसरे गांवों के लिए प्रेरणा बन सकती है। सौर ऊर्जा के उपयोग से पारंपरिक बिजली स्रोतों पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि इस अभियान में महिलाओं को नेतृत्व करने का अवसर मिला और उन्होंने इसे सफल बनाया।
नारागांव ने दिखा दिया है कि विकास के लिए केवल सरकारी योजनाएं और बजट जरूरी नहीं, स्थानीय लोगों के सामूहिक प्रयास और महिलाओं की भागीदारी भी गांव की तस्वीर बदल सकती है। अब यह मॉडल छत्तीसगढ़ के अन्य गांवों में सौर ऊर्जा और महिला स्वावलंबन के लिए मार्गदर्शक बन सकता है।
स्रोत: tv9hindi.com





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