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PISA रिपोर्ट: पश्चिमी देशों के स्कूलों में बच्चे सबसे ज्यादा शोर करते हैं

PISA रिपोर्ट के अनुसार पश्चिमी देशों के स्कूलों में बच्चे सबसे ज्यादा शोर मचाते हैं, जबकि एशियाई देशों में अनुशासन बेहतर है।

PISA रिपोर्ट: पश्चिमी देशों के स्कूलों में बच्चे सबसे ज्यादा शोर करते हैं

PISA की ताजा रिपोर्ट में बच्चों के व्यवहार का खुलासा

प्रोग्राम फॉर इंटरनेशनल स्टूडेंट असेसमेंट (PISA) की नवीनतम रिपोर्ट में यह सामने आया है कि दुनिया के किन देशों के बच्चे स्कूलों में सबसे ज्यादा शोर मचाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी देशों के स्कूलों में शोरगुल एक गंभीर समस्या है। ऑस्ट्रेलिया के 41 प्रतिशत छात्रों ने माना कि उनकी कक्षा में हमेशा भारी शोर रहता है, जबकि वैश्विक औसत 31 प्रतिशत है। इसके अलावा, 39 प्रतिशत बच्चे लैपटॉप और टैबलेट के इस्तेमाल के कारण पढ़ाई में ध्यान नहीं दे पाते।

पश्चिमी देशों में कक्षा का माहौल

न्यूजीलैंड और ब्रिटेन के स्कूलों में भी बच्चे शिक्षकों की बात नहीं सुनते और कक्षा में हंगामा करते रहते हैं। यह बच्चों की अनुशासनहीनता का संकेत है, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है। बच्चों के इस व्यवहार के कारण शिक्षकों को पढ़ाने में कठिनाई होती है और शिक्षा का स्तर प्रभावित होता है।

पूर्वी एशियाई देशों में अनुशासन

वहीं, एशियाई देशों के स्कूलों में बच्चों का व्यवहार काफी अनुशासित पाया गया है। जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर जैसे देशों में 85 प्रतिशत से अधिक छात्रों ने बताया कि पढ़ाई के दौरान कक्षा पूरी तरह शांत रहती है। इन देशों में बच्चे पूरी तरह से अनुशासित रहते हैं और शिक्षक अपना पूरा समय पढ़ाई में लगा पाते हैं। चीन के स्कूलों में भी नियम कड़े हैं, जो एक बेहतरीन अनुशासन की मिसाल हैं। पूर्वी एशिया का शिक्षा तंत्र इस मामले में अन्य देशों से आगे है।

भारत के आंकड़े और स्थिति

इस अंतरराष्ट्रीय सर्वे में भारत के ताजा आंकड़े शामिल नहीं हैं क्योंकि भारतीय शिक्षा विभाग ने PISA के इस नवीनतम सर्वेक्षण में भाग नहीं लिया था। भारत ने आखिरी बार 2009 में इस टेस्ट में हिस्सा लिया था। भारतीय स्कूलों में गुरु-शिष्य परंपरा का प्रभाव आज भी बना हुआ है, जिसके कारण बच्चे अपने शिक्षकों का सम्मान करते हैं। इसलिए, भारत के क्लासरूम में पश्चिमी देशों की तुलना में हंगामा कम होता है। बच्चों की थोड़ी बहुत मस्ती जरूर होती है, लेकिन पढ़ाई में बाधा डालने वाली अनुशासनहीनता कम ही देखी जाती है।

शिक्षा के लिए अनुशासन का महत्व

रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि बच्चों का अनुशासन पढ़ाई के माहौल को बेहतर बनाता है। जहां बच्चे शांत रहते हैं, वहां शिक्षक पूरी ऊर्जा के साथ पढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं। इसलिए, अन्य देशों के लिए पूर्वी एशिया के अनुशासन मॉडल से सीखना लाभकारी हो सकता है।

मुख्य तथ्य

  • ऑस्ट्रेलिया के 41% बच्चे कहते हैं कि क्लास में भारी शोर रहता है।
  • वैश्विक औसत शोरगुल 31% है।
  • जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर में 85% से ज्यादा बच्चे पढ़ाई के दौरान शांत रहते हैं।
  • भारत ने PISA के ताजा सर्वे में हिस्सा नहीं लिया है।

स्रोत: hindi.asianetnews.com

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संपादकीय टीम · Bharat Vistaar

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