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IIT गोवा ने इंड सेमेस्टर परीक्षा में स्टूडेंट्स को खुद सवाल और जवाब बनाने को कहा

IIT गोवा ने इंड सेमेस्टर परीक्षा में स्टूडेंट्स को खुद सवाल बनाने और जवाब देने का अनोखा तरीका अपनाया है।

IIT गोवा ने इंड सेमेस्टर परीक्षा में स्टूडेंट्स को खुद सवाल और जवाब बनाने को कहा

IIT गोवा ने इंड सेमेस्टर परीक्षा में एक नया तरीका अपनाया है, जिसमें स्टूडेंट्स को अपने सेमेस्टर के आधार पर खुद सवाल बनाने और उनके जवाब देने होते हैं। यह पेपर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है और इसे AI के युग में नकल को बेअसर करने वाला कदम माना जा रहा है।

मुख्य तथ्य

  • IIT गोवा के इंड सेमेस्टर एग्जाम में स्टूडेंट्स को 60 नंबर के सवाल खुद बनाने हैं।
  • प्रश्नों के जवाब देने के लिए दो घंटे का समय मिलेगा।
  • यह पेपर AI से नकल को रोकने के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है।
  • IITian आकाश संपूर्णानंद ने इस पेपर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया।
  • यह तरीका IIT के प्रोफेसरों की ‘फर्स्ट-प्रिंसिपल्स थिंकिंग’ पर आधारित है।

सोशल मीडिया पर IITian आकाश संपूर्णानंद की पोस्ट

IITian आकाश संपूर्णानंद पांडेय ने X (पूर्व में Twitter) पर IIT गोवा के इस अनोखे इंड सेमेस्टर पेपर को पोस्ट किया। उन्होंने बताया कि AI के इस युग में नकल को रोकने की कोशिश के बजाय, IIT के प्रोफेसरों ने नकल को पूरी तरह से बेकार कर दिया है। आकाश के अनुसार, पिछले सौ वर्षों से परीक्षाओं का उद्देश्य सही जवाब देना था, जो तब ठीक था जब जवाब सीमित स्रोतों से मिलते थे। लेकिन अब AI के चलते ‘एनालॉग सर्किट्स’ जैसे सवालों के जवाब केवल कुछ सेकंड में मिल जाते हैं।

"Everyone else is trying to catch the cheaters in the age of AI. He just made cheating pointless. IIT professors have a habit of being two moves ahead of the room. For a hundred years, exams tested one thing: can you produce the right answer. That made sense when answers were scarce and locked inside textbooks and your own memory. They are not scarce anymore. Any answer to any Analog Circuits question is five seconds away in an AI chat window. Testing recall in 2026 is testing a skill the machine has already made worthless. So this professor flipped it. Best part – it actually mirrors real engineering. In industry, nobody hands you a pre-written problem statement. The hardest part as you grow in your career is never finding solutions. It is knowing which questions are worth solving in the first place. And the @IITGoaofficial professor knows it. Checkmate — Akash Sampurnanand Pandey (@late_bloomer_7) November 6, 2026"

उन्होंने बताया कि इस नए तरीके में असली इंजीनियरिंग की तरह स्टूडेंट्स को समस्या के सवाल खुद बनाने और उनके जवाब देने होते हैं। उद्योग जगत में भी पहले से लिखी समस्या नहीं दी जाती, बल्कि यह तय करना होता है कि कौन से सवाल हल करने लायक हैं।

परीक्षा के नियम और पेपर की संरचना

IIT गोवा के इंड सेमेस्टर परीक्षा में दो सवाल पूछे गए हैं। पहले सवाल में स्टूडेंट्स को अपने सेमेस्टर में पढ़े गए सभी चैप्टर्स के आधार पर 60 नंबर के सवाल तैयार करने होते हैं। ये सवाल कोर्स की पूरी समझ को दर्शाने वाले होने चाहिए। इसके लिए छात्रों को दो घंटे दिए जाते हैं, जिसमें वे सवाल भी बनाएंगे और उनका जवाब भी देंगे।

पहले सवाल के लिए 30 नंबर निर्धारित हैं, जबकि दूसरे सवाल में खुद बनाए गए सवालों के जवाब देने के लिए 40 नंबर रखे गए हैं। छात्रों को इसके लिए अपने दोस्तों से चर्चा करने से रोक दिया गया है ताकि समानता न हो, वरना स्कोर घटाया जा सकता है।

यह नया तरीका क्यों खास है?

IIT गोवा पिछले कई वर्षों से इस तरह के पेपर लाता रहा है, जो छात्रों की समझ को बढ़ावा देते हैं। यह तरीका केवल नकल रोकने का उपाय नहीं है, बल्कि IIT के प्रोफेसरों की ‘फर्स्ट-प्रिंसिपल्स थिंकिंग’ पर आधारित है। इसका मकसद छात्रों को बुनियादी सिद्धांतों पर सोचने के लिए प्रेरित करना है।

यह परीक्षा मॉडल छात्रों को याद करने की बजाय समस्या को समझने और उसे पहचानने की क्षमता विकसित करता है। इससे छात्र इंजीनियरिंग के वास्तविक कार्यों के करीब पहुंचते हैं, जहां समस्या की पहचान करना सबसे अहम होता है।

समाचार का महत्व

AI के बढ़ते प्रभाव के बीच, IIT गोवा का यह नया परीक्षा मॉडल शिक्षा प्रणाली में बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह छात्रों की रचनात्मकता और सोचने की क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ नकल की प्रथा को भी समाप्त करता है। इससे पता चलता है कि तकनीक के बदलाव को अपनाकर शिक्षा प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

स्रोत: tv9hindi.com

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