अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव 12 दिसंबर को अयोध्या में रामलला और हनुमानगढ़ी के दर्शन करेंगे।
दर्शन की तारीख पक्की हुई
अपने पिछले अयोध्या दौरे के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अयोध्या के पूर्व विधायक और सपा के कद्दावर नेता पवन पांडेय को दर्शन की तारीख तय करने का जिम्मा दिया था। पवन पांडेय ने हरी झंडी मिलने के बाद 12 दिसंबर का दिन तय किया, और अखिलेश ने अपना वादा निभाते हुए उस दिन अयोध्या आने का कार्यक्रम लॉक कर दिया।
हनुमानगढ़ी से रामलला तक का धार्मिक कार्यक्रम
पवन पांडेय के अनुसार, 12 दिसंबर को अयोध्या पहुंचते ही अखिलेश यादव और डिंपल यादव सबसे पहले हनुमानगढ़ी में भगवान बजरंगबली के चरणों में शीश नवाएंगे। इसके बाद वे भव्य राम मंदिर पहुंचकर प्रभु श्रीराम और माता जानकी का आशीर्वाद लेंगे। पूजा-अर्चना के बाद वे अयोध्या के प्रमुख संत-महंतों से मिलेंगे, उनका आशीर्वाद लेंगे और महाप्रसाद ग्रहण करेंगे।
समाजवादी पार्टी ने इस दौरे को यादगार बनाने के लिए भव्य स्वागत की तैयारियां शुरू कर दी हैं। यह दौरा भाजपा द्वारा लगातार उठाए गए "अखिलेश राम मंदिर नहीं जाते" के आरोपों के बीच सपा के लिए राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजनीतिक रणनीति के तौर पर अहम कदम
विधानसभा चुनाव से पहले यह कदम राजनीतिक जानकारों के अनुसार सपा का बड़ा दांव है। लंबे समय के बाद सपा का कोई शीर्ष नेता धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से अयोध्या के प्रमुख मंच पर नजर आने वाला है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में अयोध्या हमेशा से केंद्र बिंदु रही है। चुनाव से पहले अखिलेश और डिंपल यादव का एक साथ अयोध्या पहुंचकर रामलला और हनुमानगढ़ी के दर्शन करना सपा के 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की रणनीति और सर्वसमाज को जोड़ने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
स्रोत: hindi.webdunia.com





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